Thursday, September, 10,2026

प्रचार की आखिरी शाम तक... पूरा जयपुर नापा, अब वोट की बारी

जयपुर: जयपुर नगर निगम चुनाव के मतदान से पहले बुधवार शाम जयपुर में चुनावी शोर थम गया। प्रचार के आखिरी दिन प्रत्याशियों में पूरा वार्ड नापने की होड़ रही। किसी ने वाहन रैली निकालकर ताकत दिखाई तो कोई समर्थकों के माथ पैदल ही गलियों में निकल पड़ा। भाजपा और कांग्रेस ने अपने विधायकों और बड़े नेताओं को मैदान में उतारकर आखिरी दिन पूरी ताकत झोंक दी। वहीं निर्दलीयों ने अपने व्यक्तिगत संपर्क और स्थानीय पकड़ को ही सबसे बड़ा हथियार बनाने के साथ वोटर्स को अपना स्टार प्रचारक बनाया। अब शुक्रवार 11 सितंबर को जयपुर के 150 वाड़ों में मतदाता प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला करेंगे। मतदान से पहले अब पर्दे के पीछे संपर्क और समीकरण साधने का दौर शुरू होगा। रूठों को मनाने से लेकर बूथ मैनेजमेंट तक पर फोकस रहेगा।

रोड शो से गलियों तक... आखिरी दिन हर दांव चला

प्रचार के अंतिम दिन जयपुर की सड़कों पर जगह जगह चुनावी रंग दिखाई दिया। वाहन रैलियां, पैदल मार्च, नुक्कड़ सभाएं और घर-घर संपर्क के जरिए प्रत्याशियों ने मतदाताओं को साधने की कोशिश की। भाजपा-कांग्रेस के बड़े नेताओं की मौजूदगी ने मुकाबले को और धार दी, वहीं स्थानीय स्तर पर निर्दलीयों की सक्रियता ने कई वाडों में त्रिकोणीय मुकाबले की तस्वीर बनाई।

भाजपाः विधायक उतरे, वार्ड-वार्ड मांगे वोट

आखिरी दिन भाजपा का चुनावी प्रबंधन पूरी तरह सक्रिय नजर आया। डिप्टी सीएम और विद्याधर नगर विधायक दीया कुमारी ने अपने विधानसभा क्षेत्र वाले वाडाँ में मोर्चा संभाला। उद्योग मंत्री और झोटवाड़ा विधायक कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने झोटवाड़ा क्षेत्र में प्रत्याशियों के समर्थन में प्रचार किया। सिविल लाइंस में विधायक गोपाल शर्मा, हवामहल विधायक बालमुकुंदाचार्य ने परकोटा क्षेत्र में और मालवीय नगर में कालीचरण सराफ ने रोड शो और जनसंपर्क के जरिए पार्टी प्रत्याशियों के लिए वोट मांगे। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने भी आखिरी दौर में प्रत्याशियों के समर्थन में प्रचार कर कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाया।

कांग्रेसः जूली से लेकर विधायक तक मैदान में

काग्रेस ने भी आखिरी दिन मोर्चा कस दिया। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने जयपुर के पाच वाहों में पहुंचकर पार्टी प्रत्याशियों के लिए प्रचार किया। वार्ड 49, 50, 60, 141 और 142 में उन्होंने रोड शो और नुक्कड़ सभाओं के जरिए मतदाताओं से कांग्रेस के पक्ष में मतदान की अपील की। किशनपोल में विधायक अमीन कागजी और आदर्श नगर में विधायक रफीक खान ने मोर्चा संभाला। कांग्रेस ने स्थानीय मुद्दों, प्रत्याशियों की व्यक्तिगत पहुंच और सरकार के खिलाफ नाराजगी को वोट में बदलने की रणनीति के साथ आखिरी दिन जनसंपर्क तेज किया।

अब मठाधीशों की धोक और जोड़-तोड़ की बारी

नगर निगम चुनाव का प्रचार थमते ही प्रत्याशियों की चुनावी रणनीति अब खुले मैदान से निकलकर पर्दे के पीछे पहुंच गई है। मतदान तक प्रत्याशियों का फोकस पार्टी संगठन के नेताओं के साथ ही स्थानीय मठाधीशों, प्रभावशाली लोगों, समाज और जातिगत संगठनों के पदाधिकारियों को साथने पर रहेगा। चुनावी भाषा में कहें तो अब थोक, मान-मनुहार और जोड़-तोड़ का दौर शुरू हो गया है। टिकट वितरण, प्रत्याशी चयन और स्थानीय समीकरणों से नाराज चल रहे पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं को अपने पाले में लाना प्रत्याशियों के लिए बड़ी चुनौती होगी। व्यक्तिगत मुलाकातों और मान-मनुहार के जरिए भीतरघात की आशंका कम करने की कोशिश होगी। जरूरत पड़ने पर वरिष्ठ नेताओं की मदद भी ली जाएगी। प्रचार बंद होने के बाद घर-घर संपर्क, फोन कॉल और छोटी बैठकों के जरिए मतदाताओं को साधने का प्रयास होगा। प्रभावशाली परिवारों और स्थानीय समूहों के जरिए आसपास के वोटरों तक पहुंच बनाई जाएगी। अंतिम दौर में बूथ मैनेजमेंट सबसे बड़ा मोर्चा होगा। समर्थक मतदाताओं की सूची, बूथवार जिम्मेदारियां और मतदान के दिन वोटरों को बूथ तक पहुंचाने की रणनीति तैयार होगी।

निर्दलीयः वोट बैंक ही बना स्टार प्रचारक

इन सबके बीच निर्दलीय प्रत्याशियों का चुनावी अंदाज अलग रहा। कहीं समर्थकों के साथ पैदल रैली निकली तो कहीं घर-घर संपर्क पर जोर रहा। बड़े नेताओं और पार्टी संगठन के बजाय निर्दलीयों ने अपने व्यक्तिगत संबंध, स्थानीय पहचान और वर्षों से बने वोट बैंक को ही सबसे बड़ा स्टार प्रचारक बताया। कई वाड़ों में बागी और निर्दलीय प्रत्याशियों ने भाजपा-कांग्रेस के समीकरणों को सीधे चुनौती दी।

अब न नारा, ना लाउडस्पीकर... घर की चौखट ही आखिरी मैदान

प्रचार समाप्त होने के साथ सार्वजनिक सभा, जुलूस, रोड शो, लाउडस्पीकर और खुले तौर पर वोट मांगने जैसी गतिविधियां बंद हो गई हैं। प्रत्याशी अब व्यक्तिगत रूप से
घर-घर संपर्क कर सकते हैं, लेकिन इसे सार्वजनिक प्रचार या सभा का रूप नहीं दिया जा सकता। सोशल मीडिया पर भी निर्वाचन नियमों और आदर्श आचार संहिता का पालन करना होगा। अब चुनावी मच खाली है, माइक बंद है और रोड शो थम गए हैं। शुक्रवार को ईवीएम के सामने प्रत्याशियों के साथ-साथ भाजपा, कांग्रेस और निर्दलीयों की आखिरी परीक्षा होगी।

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