Tuesday, July, 14,2026

सौर ऊर्जा अपनाना होगा अनिवार्य, छत का हिस्सा रहेगा आरक्षित

जयपुर: राजस्थान सरकार प्रदेश में ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। सरकार जल्द ही राजस्थान एनर्जी कंजर्वेशन एंड सस्टेनेबल बिल्डिंग कोड (RECSBC) लागू करने वाली है।

इस नए कोड का उद्देश्य बड़े व्यावसायिक भवनों में बिजली की खपत कम करना, नवीकरणीय ऊजर्जा का उपयोग बढ़ाना और भवन निर्माण को अधिक टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल बनाना है। ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने शनिवार को विद्युत भवन में राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम के अधिकारियों के साथ बैठक कर कोड और रूल्स-2026 के प्रारूपों की समीक्षा की। बैठक में कोड के विभिन्न प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा की गई और अधिकारियों को इसे जल्द अंतिम रूप देने के निर्देश दिए गए।

पहली बार ग्रीन बिल्डिंग को मिलेगा अतिरिक्त निर्माण क्षेत्र का लाभ

नए कोड की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि ऊर्जा सरक्षण और पर्यावरण अनुकूल निर्माण को अपनाने वाले भवनों को विशेष प्रोत्साहन दिया जाएगा। कोड के तहत निर्धारित प्लस मानकों का पालन करने वाले भवनों को 5 प्रतिशत अतिरिक्त बिल्ट एरिया रेश्यो (एफएआर) मिलेगा, जबकि सुपर बिल्डिंग कोड के मानकों को पूरा करने वाले भवनों को 10 प्रतिशत अतिरिक्त एफएआर का लाभ दिया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रोत्साहन रियल एस्टेट क्षेत्र में ग्रीन बिल्डिंग निर्माण को बढ़ावा देगा। अतिरिक्त एफएआर मिलने से डेवलपर्स को अधिक निर्माण क्षेत्र विकसित करने का अवसर मिलेगा, जिससे परियोजनाएं आर्थिक रूप से अधिक लाभकारी बन सकेंगी। इससे ऊर्जा दक्ष भवनों की संख्या बढ़ने की संभावना है।

ऊर्जा ऑडिटर करेंगे निगरानी

कोड़ के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम की ओर से अधिकृत ऊर्जा ऑडिटर समय-समय पर भवनों का निरीक्षण करेंगे। ये ऑडिटर यह सुनिश्चित करेंगे कि भवनों का निर्माण स्वीकृत डिजाइन और निर्धारित मानकों के अनुसार हुआ है या नहीं। यदि कोई भवन निर्धारित नियमों का पालन नहीं करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई भी की जा सकेगी। इसके लिए रिफंडेबल सिक्योरिटी डिपॉजिट और पेनल्टी जैसे प्रावधान प्रस्तावित किए गए हैं।

100 किलोवाट या अधिक लोड वाले व्यावसायिक भवनों पर लागू होंगे नए नियम

बैठक में बताया गया कि यह कोड मुख्य रूप से बड़े व्यावसायिक भवनों पर लागू होगा। जिन भवनों का बिल्ट अप एरिया 2,000 वर्गमीटर या उससे अधिक है, जिनका कनेक्टेड लोड 100 किलोवाट या उससे अधिका है अथवा जिनकी कनेक्टेड डिमांड 120 केवीए या उससे अधिक है, उन्हें इस कोड के तहत निर्धारित ऊर्जा दक्षता और सस्टेनेबिलिटी मानकों का पालन करना होगा। सरकार का मानना है कि बड़े भवनों में ऊर्जा की खपत अधिक होती है। ऐसे में यदि इन भवनों को ऊर्जा दक्ष बनाया जाता है तो बिजली की खपत में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है और पर्यावरण पर पड़ने वाले दबाव को भी कम किया जा सकता है।

ऑनलाइन पोर्टल से होगी पूरी प्रक्रिया

सरकार इस पूरी व्यवस्था को पारदर्शी और सरल बनाने के लिए एक एकीकृत ऑनलाइन वेब पोर्टल भी विकसित करेगी। इस पोर्टल के माध्यम से भवन स्वामियों, डेवलपर्स और संबंधित एजेंसियों को आवेदन, अनुमोदन और निगरानी से जुड़ी सुविधाएं एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हो सकेंगी।

आमजन व उद्योग जगत से लिए जा रहे सुझाव

राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक रोहित गुप्ता ने बताया कि कोड और रूल्स-2026 को अंतिम रूप देने से पहले आमजन, भवन निर्माताओं, आर्किटेक्ट्स, उद्योग संगठनों और अन्य हितधारकों से सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। अब तक 50 से अधिक सुझाव प्राप्त हो चुके है। इन सुझावों के आधार पर आवश्यक संशोधन कर कोड को अंतिम रूप दिया जाएगा।

आम लोगों को कैसे होगा फायदा

नया कोड केवल बिल्डर्स या बढ़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए ही नहीं, बल्कि आम लोगों के लिए भी लाभकारी साबित हो सकता है। ऊर्जा दक्ष भवनों में बिजली की खपत कम होगी, जिससे लंबे समय में बिजली बिलों में कमी आएगी। सौर ऊर्जा के उपयोग से ऊर्जा लागत और भी कम हो सकेगी। ऐसे भवन अधिक आधुनिक, सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल होंगे। ग्रीन बिल्डिंग की मांग बढ़ने से रियल एस्टेट क्षेत्र में नई संभावनाएं पैदा होगी और लोगों को बेहतर सुविधाओं वाले भवन उपलबध हो सकेंगे। राजस्थान एनर्जी कंजर्वेशन एंड सस्टेनेबल बिल्डिंग कोड लागू होने के बाद प्रदेश में ग्रीन और ऊर्जा दक्ष भवनों के निर्माण को नई गति मिलने की उम्मीद है।

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