Thursday, January, 29,2026

हम एनिमल लवर हैं, लेकिन इंसानों की जान पहले: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को आवारा कुत्तों के बढ़ते खतरे को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि आखिर आम लोग कब तक कुत्तों के कारण परेशानी झेलते रहेंगे। अदालत ने साफ कहा कि वह पशु प्रेमी है, लेकिन इंसानों की जान और सुरक्षा सर्वोपरि है। कोर्ट ने विशेष रूप से स्कूलों, अस्पतालों और अदालत परिसरों में आवारा कुत्तों की मौजूदगी पर सवाल उठाते हुए पूछा कि इन्हें वहां से हटाने पर आपत्ति क्यों होनी चाहिए। न्यायाधीश विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एन.वी. अंजारिया की पीठ ने स्पष्ट किया कि उसका आदेश सड़कों के लिए नहीं, बल्कि केवल संस्थागत परिसरों तक सीमित है। पीठ ने कहा कि सड़कों पर आवारा जानवरों के कारण हो रहे हादसे भी जानलेवा साबित हो रहे हैं। अदालत ने टिप्पणी की कि कोई यह नहीं जान सकता कि सुबह-सुबह कौन सा कुत्ता किस मूड में होगा और कब हमला कर देगा।

नसबंदी की दलील पर कोर्ट बोला... अब कुत्तों की काउंसलिंग ही बाकी रह गई

करीब ढाई घंटे चली सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने आवारा कुत्तों के पक्ष में दलील देते हुए कहा कि जो कुत्ता काटे, उसकी नसबंदी की जा सकती है। इस पर कोर्ट ने तंज कसते हुए कहा कि अब तो बस कुत्तों की काउंसलिंग ही बाकी रह गई है, ताकि वे दोबारा न काटें। जब सिब्बल ने कहा कि उन्हें कभी किसी कुत्ते ने नहीं काटा, तो कोर्ट ने जवाब दिया, 'आप खुशकिस्मत हैं। बच्चों और बड़ों को काटा जा रहा है, लोग मर रहे हैं।' सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से सवाल किया कि 2018 में एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) को लेकर दिए गए सख्त निर्देशों का सही तरीके से पालन क्यों नहीं हुआ। कोर्ट ने कहा कि नियमों के अनुपालन में देरी का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। अदालत ने चेतावनी दी कि नगर निकायों को नियमों, मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) और दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करना होगा, अन्यथा सख्त कार्रवाई की जाएगी।

देश में 5 करोड़ से ज्यादा आवारा कुत्ते

सीनियर एडवोकेट केके वेणुगोपाल ने कोर्ट को बताया कि देश में आवारा कुत्तों की आबादी 5 करोड़ से अधिक है। आंकड़ों के मुताबिक, भारत में करीब 5 करोड़ 25 लाख कुत्ते हैं, जिनके लिए लगभग 77 हजार शेल्टर की जरूरत होगी। प्रति कुत्ता रोजाना 40 रुपए के हिसाब से भोजन पर ही 61 करोड़ रुपए से अधिक का खर्च आएगा। उन्होंने यह भी बताया कि हजारों स्कूलों में बिजली, शौचालय और पीने के पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी है, ऐसे में बाड़ लगाने के लिए फंड जुटाना संभव नहीं।

राज्यों की ढिलाई पर SC सख्त

कोर्ट ने यह भी नोट किया कि पिछले 20 दिनों में राजस्थान हाई कोर्ट के दो न्यायाधीश सड़क दुर्घटनाओं का शिकार हुए हैं, जिनमें से एक गंभीर रूप से घायल हैं। इसे गंभीर मुद्दा बताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्यों और नगर निकायों को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। मामले मामले की अगली सुनवाई 8 जनवरी को सुबह 10:30 बजे होगी।

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