Friday, March, 06,2026

चांदी के रथ पर विराजे सांवलिया सेठ, भक्ति रस में डूबा धाम

चित्तौड़गढ: चित्तौड़गढ़ जिले के मंडफिया स्थित प्रसिद्ध श्री सांवलिया जी मंदिर में बुधवार को होली का पर्व अपार उत्साह, आस्था और उल्लास के साथ मनाया गया। सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। राजस्थान के अलावा मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र सहित देशभर से भक्त सांवलिया सेठ के दर्शन और उनके साथ होली खेलने के लिए पहुंचे। सुबह 11:15 बजे ठाकुर जी की राजभोग आरती की गई, जिसमें मंदिर मंडल के अध्यक्ष जानकी दास वैष्णव, कार्यकारी अधिकारी प्रभा गौतम और अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे। आरती के दौरान पूरा मंदिर परिसर जयकारों से गूंज उठा। इसके बाद छोटे शालिग्राम स्वरूप में भगवान की विधि-विधान से विशेष पूजा-अर्चना की गई। विशेष पूजा के बाद सांवलिया सेठ के शालिग्राम स्वरूप को चांदी के रथ में विराजित किया गया।

नाथद्वारा में निकली बादशाह की सवारी

नाथद्वारा के श्रीनाथजी मंदिर में धुलंडी के अवसर पर मंगलवार रात्रि पारंपरिक बादशाह की सवारी निकाली गई। इस अनूठी मुगलकालीन परंपरा को देखने बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े। सवारी की शुरुआत गुर्जरपुरा स्थित बादशाह गली से हुई। बादशाह का रूप धारण किए व्यक्ति ने नकली दाढ़ी-मूंछ, मुगलकालीन पोशाक और आंखों में काजल लगाकर दोनों हाथों में श्रीनाथजी की छवि धारण की और पालकी में सवार होकर नगर भ्रमण पर निकले। मंदिर मंडल के बैंड ने मधुर धुनों से सवारी की अगवानी की। सूरजपोल पहुंचने पर बादशाह बने व्यक्ति ने नवधा भक्ति के प्रतीक नौ सीढ़ियों को अपनी दाढ़ी से साफ किया। बाद में मंदिर के परछना विभाग की ओर से वस्त्र-आभूषण भेंट किए गए। मान्यता है कि यह परंपरा औरंगजेब काल की ऐतिहासिक घटना से जुड़ी है। जिसे आज भी श्रद्धा से निभाया जाता है।

चारभुजानाथ धाम में फागोत्सव का शुभारंभ

मेवाड़ के प्रसिद्ध चारभुजानाथ मंदिर में मंगलवार से 16 दिवसीय फागोत्सव की विधिवत शुरुआत हो गई। झूला दर्शन के साथ भक्तों ने ठाकुरजी की अलौकिक झांकी के दर्शन किए। मंदिर परिसर में भक्ति और उत्साह का वातावरण बना रहा। विशेष बात यह है कि जहां श्रीनाथजी मंदिर सहित पुष्टिमार्गीय मंदिरों में होली के अगले दिन डोलोत्सव के साथ फागोत्सव का समापन हो जाता है, वहीं चारभुजानाथ धाम में होलिका दहन के बाद फागोत्सव प्रारंभ होता है। यहां यह उत्सव पूरे 16 दिनों तक रंग-गुलाल और भक्ति भाव से मनाया जाता है। होलिका दहन के बाद 3 मार्च से शुरू हुआ यह उत्सव 18 मार्च तक चलेगा। इस दौरान प्रतिदिन विशेष सेवा, श्रृंगार और दर्शन की व्यवस्था रहेगी। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।

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