Sunday, February, 22,2026

एयर डिफेंस वॉरियर्स ने आसमान में ध्वस्त किए दुश्मन के मंसूबे

जैसलमेर: राजस्थान के तपते रेगिस्तान और दूर-दूर तक फैले रेत के धोरों के बीच भारतीय सेना ने अपनी हवाई सुरक्षा क्षमता का दमदार प्रदर्शन किया। सीमावर्ती क्षेत्र में आयोजित युद्धाभ्यास के दौरान कोणार्क कॉप्स के डेजर्ट वॉरियर्स ने शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम 'स्टेला-10M' के साथ ऐसी सटीकता दिखाई, जिसने स्पष्ट संदेश दिया कि भारतीय आसमान पूरी तरह सुरक्षित है।

रेगिस्तान की कठिन परिस्थितियां-तेज गर्मी, उड़ती रेत और खुला भू-भाग-इस अभ्यास की असली परीक्षा थीं। अभ्यास का उद्देश्य कम ऊंचाई पर उड़ने वाले ड्रोन, हेलीकॉप्टर और लो-फ्लाइंग एयरक्राफ्ट जैसे संभावित खतरों को तुरंत पहचानकर निष्क्रिय करने की क्षमता को परखना था। बदलते युद्ध स्वरूप में ड्रोन आधारित हमले और निगरानी गतिविधियां तेजी से बढ़ी हैं, जिससे मोबाइल एयर डिफेंस सिस्टम की भूमिका और अहम हो गई है।

अभ्यास के दौरान जैसे ही हवाई लक्ष्य ने सीमा क्षेत्र में प्रवेश का सिमुलेशन किया, एयर डिफेंस यूनिट्स तुरंत सक्रिय हो गई। लक्ष्य की पहचान, ट्रैकिंग और मिसाइल लॉन्च की पूरी प्रक्रिया कुछ ही क्षणों में पूरी की गई। स्ट्रेला-10M से दागी गई मिसाइल ने लक्ष्य को हवा में ही ध्वस्त कर दिया। आसमान में गूंजे धमाके ने सैनिकों की तैयारी और तकनीकी दक्षता का प्रमाण दिया। अधिकारियों के अनुसार यह केवल हथियार प्रदर्शन नहीं, बल्कि समन्वय, प्रतिक्रिया समय और तकनीकी दक्षता की व्यापक परीक्षा थी। एयर डिफेंस यूनिट्स को ग्राउंड फोर्सेज के साथ तालमेल बिठाकर काम करना होता है, ताकि अग्रिम मोर्चे पर तैनात टैंक, बख्तरबंद वाहन और पैदल सैनिकों को हवाई हमलों से सुरक्षा मिल सके। स्ट्रेला-10M एक शॉर्ट रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल सिस्टम है, जो ट्रैक्ड बख्तरबंद वाहन पर तैनात रहता है। इसका इन्फ्रारेड सीकर दुश्मन के विमान या ड्रोन के इंजन से निकलने वाली गर्मी को पहचान कर लक्ष्य का पीछा करता है। एक बार लॉक होने के बाद मिसाइल तब तक पीछा करती है, जब तक लक्ष्य को निष्क्रिय न कर दे। उबड़-खाबड़ रेतीले इलाकों में इसकी गतिशीलता इसे और प्रभावी बनाती है।

स्ट्रेला-10M और अभ्यास की विशेषताएं

  • शॉर्ट रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल सिस्टम।
  • ट्रैक्ड बख्तरबंद वाहन पर तैनाती, उच्च गतिशीलता।
  • इन्फ्रारेड से लक्ष्य की पहचान ।
  • ड्रोन, हेलीकॉप्टर और लो-फ्लाइंग एयरक्राफ्ट पर प्रभावी।
  • कम ऊंचाई वाले हवाई खतरों के खिलाफ पहली रक्षा पंक्ति।
  • ग्राउंड फोर्सेज के साथ समन्वित संचालन।
  • रेगिस्तान की कठिन परिस्थितियों में सफल परीक्षण।

अभ्यास के दौरान उच्च तापमान में उपकरणों की परखी कार्यक्षमताः राजस्थान का सीमावर्ती क्षेत्र भौगोलिक रूप से खुला है, जहां प्राकृतिक अवरोध कम है। ऐसे में कम ऊंचाई पर उड़ने वाले ड्रोन या छोटे विमान रहार से बचने की कोशिश कर सकते हैं। शॉर्ट रेज एयर डिफेंस सिस्टम यहां पहली रक्षा पंक्ति का कार्य करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य के युद्ध मल्टी-लेयर एयर डिफेंस संरचना पर आधारित होंगे, जिसमें लॉन्ग, मीडियम और शॉर्ट रेंज सिस्टम का संयुक्त उपयोग किया जाएगा। अभ्यास के दौरान उच्च तापमान में उपकरणों की कार्यक्षमता भी परखी गई। इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और मिसाइल तंत्र ने बिना किसी तकनीकी बाधा के काम किया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि सैनिक और उपकरण दोनों कठोर परिस्थितियों के अनुरूप तैयार हैं। यह युद्धाभ्यास केवल तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन नहीं, बल्कि सैनिकों के मनोबल और आत्मविश्वास का भी परिचायक था। संदेश साफ है। सीमा पर तैनात जवान जमीन ही नहीं, आसमान की भी चौकसी कर रहे हैं।

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