Saturday, February, 21,2026

ट्रंप की 'टैरिफ दादागिरी' पर सुप्रीम 'तमाचा'

वॉशिंगटन: अमेरिका की सर्वोच्च अदालत ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बहुचर्चित टैरिफ नीति को बड़ा झटका देते हुए कई देशों पर लगाए गए व्यापक आयात शुल्क (टैरिफ) रद्द कर दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट यूनाइटेड स्टेट्स ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाते हुए स्पष्ट कहा कि अमेरिकी संविधान के तहत टैक्स और टैरिफ लगाने का अधिकार केवल कांग्रेस (संसद) को है, राष्ट्रपति को नहीं। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल कर टैरिफ थोपना संवैधानिक दायरे से बाहर है। मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने टिप्पणी की कि संविधान निर्माताओं ने कराधान की शक्ति कार्यपालिका को नहीं सौंपी। हालांकि जस्टिस सैमुअल एलिटो, क्लेरेंस थॉमस और ब्रेट कावानाथ ने असहमति जताते हुए कहा कि नीति की उपयोगिता अलग प्रश्न है, लेकिन कानूनी वैधता पर अलग राय हो सकती है। फैसले का असर वैश्विक स्तर पर देखने को मिल सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिका में निर्यात करने वाले देशों जैसे भारत, चीन और यूरोपीय राष्ट्रों को राहत मिलेगी। कई आयातित वस्तुएं सस्ती हो सकती हैं और वैश्विक शेयर बाजारों में सकारात्मक रुझान देखने को मिल सकता है।

डोनाल्ड ट्रंप का कार्यकाल और परमाणु शक्ति का संकट

डोनाल्ड ट्रंप के शासनकाल में अमेरिका की वैश्विक प्रतिष्ठा में भारी गिरावट देखी गई। उनके अनिश्चित व्यवहार और आक्रामक बयानों ने दुनिया को कई बार परमाणु युद्ध के कगार पर खड़ा किया। आलोचकों का मानना है कि ट्रंप परमाणु हथियारों जैसे विनाशकारी विकल्पों के साथ किसी 'बच्चे के खिलौने' की तरह खेल रहे थे, जिससे वैश्विक सुरक्षा खतरे में पड़ गई थी। परंतु, लोकतंत्र में संतुलन अनिवार्य है। सुप्रीम कोर्ट और संवैधानिक संस्थाओं ने राष्ट्रपति की असीमित शक्तियों पर लगाम लगाकर वह 'खिलौना' छीन लिया है।

किन टैरिफ पर गाज ?

यह फैसला उन रेसिप्रोकल टैरिफ पर लागू होगा, जिनके तहत भारत पर 18 प्रतिशत, चीन पर 34 प्रतिशत और अन्य देशों पर 10 प्रतिशत बेसलाइन शुल्क लगाया गया था। इसके अलावा कनाडा, चीन और मैक्सिको से आने वाले कुछ उत्पादों पर लगाया गया 25 प्रतिशत विशेष टैरिफ भी निरस्त कर दिया गया है। हालांकि स्टील और एल्युमिनियम पर अन्य कानूनों के तहत लगाए गए शुल्क फिलहाल प्रभाव में रहेंगे।

यह फैसला निराशाजनकः ट्रंप

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि यह फैसला बहुत निराशाजनक है। उन्हें कोर्ट के कुछ सदस्यों पर शर्म आ रही है कि उनमें हमारे देश के लिए सही काम करने की हिम्मत नहीं है।

200 अरब डॉलर पर सस्पेंस

एक बड़ा सवाल 200 अरब डॉलर से अधिक की उस राशि पर है, जो टैरिफ के रूप में वसूली गई। कई कंपनियां पहले ही रिफंड के लिए अदालत का दरवाजा खटखटा चुकी हैं। अब यह स्पष्ट नहीं है कि सरकार को यह राशि लौटानी पड़ेगी या नहीं। ट्रंप प्रशासन ने अप्रैल 2025 में 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पार्क्स एक्ट (IEEPA) का सहारा लेते हुए इन टैरिफ की घोषणा की थी।

क्या नैतिकता के आधार पर ट्रंप देंगे इस्तीफा !

अमेरिका की सर्वोच्च अदालत के ऐतिहासिक फैसले ने राष्ट्रपति ट्रंप की टैरिफ नीति पर निर्णायक विराम लगा दिया। लंबे समय से विवादों में रही 'टैरिफ दादागिरी' पर अदालत की रोक ने यह स्पष्ट कर दिया कि संवैधानिक सीमाओं से ऊपर कोई नहीं। कहा जा रहा है कि आखिर यह तो होना ही था एक दिन..! फैसले के बाद वैश्विक व्यापार जगत में खुशी की लहर है। राजनीतिक हलकों में नई बहस शुरू हो गई है, क्या नैतिकता के आधार पर ट्रंप इस्तीफा देंगे?

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