Thursday, January, 29,2026

RSSB भर्ती में 'डिजिटल महाघोटाला' OMR से अयोग्य अभ्यर्थी बने टॉपर

जयपुर: राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (आरएसएसबी) द्वारा आयोजित सुपरवाइजर (महिला अधिकारिता) सीधी भर्ती परीक्षा-2018, प्रयोगशाला सहायक भर्ती परीक्षा-2018 एवं कृषि पर्यवेक्षक भर्ती परीक्षा-2018 में बड़े स्तर पर फर्जीवाड़ा सामने आया है। स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने इस प्रकरण में बड़ी कार्रवाई करते हुए राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड के तत्कालीन तकनीकी प्रमुख सहित पांच लोगों को गिरफ्तार किया है।

इन तीनों भर्ती परीक्षाओं के लिए कुल 3,212 पदों पर 9,40,038 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। परीक्षाएं वर्ष 2019 में आयोजित की गई थीं। परीक्षा परिणाम तैयार करने के लिए ओएमआर शीट्स की स्कैनिंग एवं डाटा प्रोसेसिंग का गोपनीय कार्य आउटसोर्स फर्म राभव लिमिटेड, नई दिल्ली को सौंपा गया था।

अनुसंधान में सामने आया कि फर्म के कर्मचारियों ने ओएमआर शीट्स की स्कैनिंग के बाद कम्प्यूटर सिस्टम में वास्तविक डाटा से छेड़छाड़ की। चुनिंदा अभ्यर्थियों के प्राप्तांकों में फोटोशॉप के माध्यम से वृद्धि की गई, जिससे अयोग्य अभ्यर्थी चयनित हो गए। बोर्ड द्वारा मूल ओएमआर शीट्स की दोबारा स्कैनिंग कराने पर परिणामों में गंभीर विसंगतियां सामने आई।

एसओजी के एडीजी विशाल बंसल ने बताया कि अनुसंधान में यह तथ्य सामने आया कि राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड में तत्कालीन सिस्टम एनालिस्ट-कम-प्रोग्रामर (उप निदेशक) एवं तकनीकी प्रमुख संजय माथुर इस आपराधिक षड्यंत्र में सक्रिय रूप से शामिल थे। उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए स्कैनिंग टीम और आउटसोर्स फर्म के कर्मचारियों से मिलीभगत कर अपने परिचित अभ्यर्थियों को अवैध लाभ पहुंचाया।

कंपनी मालिक भी पहले हो चुका है गिरफ्तार

आउटसोर्स फर्म राभव लिमिटेड के मालिक रामप्रवेश सिंह को अक्टूबर 2025 में ही गिरफ्तार किया जा चुका था, लेकिन एसओजी ने उनकी गिरफ्तारी को गोपनीय रखा, ताकि फर्जीवाड़े की पूरी कड़ी को स्पष्ट रूप से उजागर किया जा सके। जांच में सामने आया कि कंपनी के कर्मचारी शादान खान और विनोद कुमार गौड़ ने संजय माथुर व प्रवीण गंगवाल से मिलकर दलालों के माध्यम से 36 अभ्यर्थियों के अंकों में काट-छांट की और लाखों रुपए की अवैध कमाई की।

एक अभ्यर्थी के 63 अंक बढ़ाकर 182 किए

उदाहरण के तौर पर पूनम माथुर को वास्तविक रूप से लगभग 63 अंक प्राप्त हुए थे, लेकिन फर्जीवाड़े के जरिए परिणाम में 182 अंक दर्शाए गए। इसी तरह अन्य अभ्यर्थियों के 30 से 50 अंक बढ़ाकर 185 से अधिक अंक दिखाए गए। कई मामलों में तो नकारात्मक अंक (-6) प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों के भी 259 अंक दर्शाए गए।

एक-एक अभ्यर्थी के नंबर बढ़ाने का दिया गया लालच

फर्जीवाड़ा करने के लिए कंपनी के कर्मचारी शादान खान और विनोद कुमार गौड ने संजय माथुर और प्रवीण गंगवाल के साथ मिलकर अपने परिचित अभ्यर्थियों को लाभ पहुंचाने की एवज में यह कृत्य किया। बदले में दोनों कर्मचारियों ने 36 अभ्यर्थियों की ओएमआर शीट्स में काट-छांट कर अंक बढाए और लाखों रुपए की अवैध धनराशि अर्जित की। संजय माथुर ने रिश्ते में साली लगने वाली पूनम माथुर तथा प्रवीण गंगवाल ने अपनी एक रिश्तेदार के अंक बढ़वाए।

2019 में यूपी एसटीएफ ने खोला था मामला

15 अगस्त 2019 को उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने शादान खान और विनोद कुमार गौड़ को 61.50 लाख रुपए नकद के साथ गिरफ्तार किया था। उनके मोबाइल फोन में राजस्थान की कई परीक्षाओं की ओएमआर शीट्स में छेड़छाड के साक्ष्य मिले थे। पूछताछ में सामने आया कि राभव लिमिटेड ने राजस्थान में करीब 9 भर्ती परीक्षाओं की ओएमआर स्कैनिंग का कार्य किया था।

जांच समिति में मुख्य सूत्रधार को भी बनाया गया सदस्य

गंभीर बात यह है कि फर्जीवाड़े की जांच के लिए बोर्ड द्वारा गठित प्रशासनिक समिति में मुख्य सूत्रधार संजय माथुर और प्रवीण गंगवाल को भी सदस्य बनाया गया ताकि जांच को प्रभावित किया जा सके। एसओजी के डीआईजी परिस देशमुख के निर्देशन में की गई जांच के बाद अनुसंधान अधिकारी यशवंत सिंह यादव ने प्रकरण में राभव लिमिटेड के कर्मचारी शादान खान व विनोद कुमार गौड़, अभ्यर्थी पूनम माथुर, संजय माथुर (तत्कालीन उप निदेशक/सिस्टम एनालिस्ट, आरएसएसबी) एवं प्रवीण गंगवाल (प्रोग्रामर, आरएसएसबी) को गिरफ्तार किया।

कांग्रेस शासन के भर्ती घोटालों का खुलासा कर रही SOG: दिलावर

शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि कांग्रेस शासन में हुई भर्तियों में बड़े पैमाने पर घोटाले किए गए, जिनके काले कारनामों का खुलासा अब एसओजी कर रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में भाजपा की सरकार पूर्ण ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ कार्य कर रही है। दिलावर ने कहा कि पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा को यह समझना चाहिए कि कांग्रेस शासनकाल में वर्ष 2018 की भर्तियों में ओएमआर शीट में गड़बड़ी की गई थी। अब एसओजी पूरी गंभीरता से जांच कर रही है।

पेपर लीक घोटाले में कांग्रेस के बड़े नेताओं का हाथ: बेढम

एसओजी की कार्रवाई पर गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेदम ने कहा कि जिन लोगों को गिरफ्तार किया है, उन्होंने सुपरवाइजर भर्ती-2018, प्रयोगशाला सहायक भर्ती और कृषि परर्यवेक्षक भर्ती परीक्षाओं में ओएमआर शीट में बदलाव किए थे। बेदम ने कहा कि अभ्यर्थियों के वास्तविक अंकों में फेरबदल कर उन्हें बढ़ा दिया गया। ओएमआर शीट में तब्दीली और विभिन्न गड़बड़ियों का एक संगठित षड्यंत्र चल रहा था। चयन के बदले लाखों-करोड़ों रुपए की अवैध उगाही की जा रही थी।

पूर्व सरकार में नहीं हुई कार्रवाई

मामला वर्ष 2019 में ही सामने आ गया था, लेकिन पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई। भजनलाल सरकार के गठन के बाद एसआईटी का गठन हुआ और शिकायत एसओजी तक पहुंची। जनवरी 2025 में दो एफआईआर दर्ज की गई। जांच को गोपनीय रखते हुए अक्टूबर 2025 में कंपनी मालिक की गिरफ्तारी की गई। अब पूरे नेटवर्क का खुलासा हो रहा है। एसओजी मामले में जल्द ही दलालों, अन्य अभ्यर्थियों और संलिप्त लोगों की गिरफ्तारी करेगी।

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