Thursday, January, 29,2026

विपक्ष के आंदोलन के ऐलान के बीच भाजपा की रणनीति तय

जयपुर: केंद्र सरकार की ओर से मनरेगा की जगह लाए गए नए विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी वीबी जी-राम-जी विधेयक को लेकर राजस्थान में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। एक तरफ भाजपा इस नए कानून के फायदे बताने के लिए प्रदेश स्तर पर जनजागरण अभियान चलाने जा रही है तो दूसरी तरफ कांग्रेस पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नेतृत्व में इसे गरीबों के हक पर हमला बताकर विरोध कर रही है।

भाजपा ने जी-राम-जी कानून को मनरेगा से बेहतर बताते हुए इसे जनता तक पहुंचाने की ठोस योजना बनाई है। पार्टी का कहना है कि पुराने मनरेगा में कई कमियां थीं, जैसे पारदर्शिता की कमी और भ्रष्टाचार। नए कानून में ग्रामीण परिवारों को 100 की जगह 125 दिन रोजगार की गारंटी मिलेगी, साथ ही निगरानी और जवाबदेही की व्यवस्था मजबूत की गई है। राजस्थान में प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ के निर्देश पर वीबी-जी राम- जी जनजागरण अभियान की प्रदेश समिति गठित की गई है। इस समिति में कैलाश चौधरी (प्रदेश अध्यक्ष, किसान मोर्चा), जसवंत सिंह विश्नोई (अध्यक्ष, राज्य जीव-जंतु कल्याण बोर्ड), प्रभुलाल सैनी (पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री), गुरदीप सिंह (पूर्व विधायक) और चंद्रकांता मेघवाल (पूर्व विधायक) शामिल हैं। भाजपा कार्यकर्ता बूथ स्तर तक जाकर आम लोगों को नए कानून के प्रावधान और फायदे समझाएंगे। पार्टी का फोकस ग्रामीण क्षेत्रों पर है, जहां कार्यकर्ता मजदूरों और किसानों से सीधा संवाद करेंगे।

कांग्रेस का हमला... नया कानून जनविरोधी

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जी-राम-जी कानून को जनविरोधी करार दिया है। उन्होंने कहा कि मनरेगा सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा और गरीबों का मजबूत सहारा है। यूपीए सरकार ने इसे लोगों का कानूनी अधिकार बनाया था, लेकिन अब केंद्र सरकार इसे सरकारी मेहरबानी तक सीमित कर कमजोर कर रही है। कांग्रेस राजस्थान सहित पूरे देश में 45 दिवसीय मनरेगा बचाओ अभियान चला रही है। राजस्थान में भी यह अभियान जोर-शोर से चलेगा। गहलोत ने सभी कांग्रेस कार्यकर्ताओं और आम जनता से अपील की है कि गरीबों के हक की इस लड़ाई में शामिल हों। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार यह फैसला वापस नहीं लेती, संघर्ष जारी रहेगा।

दोनों पार्टियों की लड़ाई ग्रामीण के लिए

राजस्थान जैसे ग्रामीण बहुल राज्य में यह मुद्दा सीधे लाखों मजदूरों और किसानों को प्रभावित करता है। भाजपा नए कानून को विकसित भारत का हिस्सा बताकर समर्थन जुटाना चाहती है, जबकि कांग्रेस इसे पुरानी योजना को खत्म करने की साजिश बता रही है। आने वाले दिनों में दोनों पार्टियां गांव-गांव तक पहुंचकर अपनी बात रखेंगी, जिससे सियासी माहौल और गरमाएगा।

 

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