Thursday, January, 29,2026

छात्रसंघ चुनाव संवैधानिक अधिकार... लेकिन शिक्षा से ऊपर नहीं

जयपुर: राजस्थान हाई कोर्ट ने प्रदेश में छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग से जुड़ी याचिकाओं का निस्तारण कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि छात्रसंघ चुनाव छात्रों का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन यह शिक्षा के मौलिक अधिकार से ऊपर नहीं हो सकता। जस्टिस समीर जैन की एकलपीठ ने जय राव व अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।

कोर्ट ने निर्देश दिए कि चुनाव कराए जाने की स्थिति में मतपेटियों को कॉलेज परिसरों में न रखा जाए, ताकि शैक्षणिक माहौल प्रभावित न हो। साथ ही विश्वविद्यालयों को 19 जनवरी को बैठक बुलाकर आगामी 2025-26 शैक्षणिक सत्र में छात्रसंघ चुनाव कराए जाएं या नहीं, इस पर स्पष्ट निर्णय लेने तथा उसके कारण दर्ज करने को कहा गया है। इससे पहले 14 नवंबर को अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था।

याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता शांतनु पारीक ने तर्क दिया कि विद्यार्थियों को अपना प्रतिनिधि चुनने का मौलिक अधिकार है, जो संविधान से प्राप्त है। राज्य सरकार द्वारा चुनाव न कराना इस अधिकार का उल्लंघन है। उन्होंने हाई कोर्ट की तीन न्यायाधीशों की खंडपीठ के पूर्व फैसले का हवाला दिया, जिसमें राजस्थान में छात्रसंघ चुनावों पर रोक न लगाने की बात कही गई थी। लिंगदोह समिति की रिपोर्ट के अनुसार, छात्रसंघ चुनाव हर वर्ष सत्र शुरू होने के छह से आठ सप्ताह के भीतर कराए जाने चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के केरल राज्य बनाम काउंसिल ऑफ प्रिंसिपल्स कॉलेज प्रकरण में भी इसे मौलिक अधिकार माना गया है। याचिकाकर्ताओं ने राज्य सरकार के उस परिपत्र को तर्कहीन और असंवैधानिक बताया, जिसमें चुनाव न कराने का निर्णय लिया गया था। उनका कहना था कि छात्रसंघ चुनाव छात्रों की लोकतांत्रिक भागीदारी सुनिश्चित करते हैं।

सरकार का पक्षः चुनाव बाध्यकारी नहीं, कुलपतियों की सिफारिश

राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद ने याचिकाओं पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ताओं को पहले डीन स्टूडेंट वेलफेयर के समक्ष अपनी बात रखनी चाहिए थी, न कि सीधे हाई कोर्ट में आना चाहिए था। छात्रसंघ चुनाव कराना संवैधानिक रूप से बाध्यकारी नहीं है और ना ही इसमें भाग लेना मौलिक अधिकार है। महाधिवक्ता ने कहा कि सेमेस्टर शुरू हुए काफी समय बीत चुका है, ऐसे में इस सत्र में चुनाव कराना संभव नहीं है। प्रदेश के नौ विश्वविद्यालयों के कुलपतियों ने भी छात्रसंघ चुनाव नहीं कराने की सिफारिश की है। सरकार का तर्क था कि शैक्षणिक गतिविधियों पर फोकस बनाए रखने के लिए चुनाव टाले जा सकते हैं।

अदालत के दिशा-निर्देश और प्रतिक्रिया

फैसले में जस्टिस उमाशंकर व्यास की एकलपीठ के पूर्व निर्देशों का भी उल्लेख किया गया, जिसमें चुनाव आयोग और राज्य सरकार को स्पष्ट और पारदर्शी नीति बनाने को कहा गया था, ताकि शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित न हों। इस फैसले से 2025-26 सत्र के छात्रसंघ चुनावों की स्थिति स्पष्ट हो गई है। हालांकि चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे छात्रों को फिलहाल झटका लगा है, वहीं राज्य सरकार को राहत मिली है। अदालत ने सभी पक्षों को सुनने के बाद यह निर्णय दिया है, जिससे प्रदेश के शैक्षणिक संस्थानों में स्थिरता बनाए रखने पर जोर दिया गया है। फिलहाल चुनाव न कराने का निर्णय बरकरार रहेगा, लेकिन भविष्य के सत्रों के लिए स्पष्ट रूपरेखा तय करने पर फोकस किया गया है।

  Share on

Related News

Connect With Us

visit e-papers
Epaper

आज का राशिफल

image

मेष

रुके काम बनेंगे, नौकरीपेशा और व्यापारियों के लिए शुभ।

image

वृष

आर्थिक स्थितियां बेहतर होने के साथ धनलाभ होगा।

image

मिथुन

गुरु शुभ फल देंगे, शत्रु पराजित होंगे

image

कर्क

मिलाजुला असर रहेगा, अतिरिक्त परिश्रम के साथ नौकरी पेशा को दिक्कतें आ सकती है।

image

सिंह

कार्यक्षेत्र में मान-सम्मान के साथ मकान,वाहन सुख मिलेगा।

image

कन्या

कामकाज के अवसरों में वृद्धि, भाग्य का साथ मिलेगा।

image

तुला

धन की रुकावटें दूर होंगी, लाभ के अवसर बढ़ेंगे, धर्म में रुचि बढ़ेगी।

image

वृश्चिक

आर्थिक स्थिति सुधरेगी, व्यापार में निवेश संबंधी फैसले की आजादी मिलेगी।

image

धनु

लाभ में वृद्धि होगी, कोई बड़ी डील हाथ लग सकती है।

image

मकर

सुखद पलों की प्राप्ति होगी। फिजूल के खर्चे बढ़ेंगे, सुख सुविधाओं में इजाफा होगा।

image

कुंभ

धनलाभ के अवसरों में वृद्धि के साथ अपनी योजनाओं पर काम करते रहे।

image

मीन

संभलकर रहे, जल्दबाजी नहीं दिखाए। कानूनी वाद-विवादों से बचे।

Gallery