Friday, February, 13,2026

'रिपोर्ट कागजों पर कुछ और, धरातल पर कुछ और': HC

जयपुर: राजस्थान हाई कोर्ट ने प्रदेश के सरकारी स्कूलों की जर्जर हालत और बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर शिक्षा विभाग के अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई है। झालावाड़ स्कूल हादसे से जुड़ी स्वप्रेरित जनहित याचिका पर सोमवार को सुनवाई के दौरान प्रमुख शिक्षा सचिव कृष्ण कुणाल और शिक्षा निदेशक सीताराम जाट कोर्ट में पेश हुए। जस्टिस महेंद्र कुमार गोयल और जस्टिस अशोक कुमार जैन की खंडपीठ ने अधिकारियों की ओर से पेश की गई रिपोर्ट को 'कागजों पर कुछ और, धरातल पर कुछ और' बताते हुए नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि विभाग की लापरवाही से बच्चों की सुरक्षा खतरे में है और समाज को जवाब देना मुश्किल हो रहा है।

बच्चियों के लिए टॉयलेट की कमीः दिन भर पानी नहीं पीतीं

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने विशेष रूप से बच्चियों की समस्याओं पर गंभीर टिप्पणी की। जस्टिस गोयल ने शिक्षा सचिव से कहा कि आप स्वच्छ भारत मिशन की बात करते हैं, लेकिन स्कूलों में बच्चियों के लिए टॉयलेट की समुचित व्यवस्था भी नहीं कर पा रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि टॉयलेट की कमी के कारण बच्चियां स्कूल में पानी भी नहीं पीतीं, ताकि उन्हें बार-बार टॉयलेट न जाना पड़े। कोर्ट ने टिप्पणी की कि हम बच्चों और समाज को जवाब नहीं दे पा रहे हैं। यह शिक्षा विभाग की उदासीनता को उजागर करता है, जहां बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी से छात्राओं की सेहत और शिक्षा प्रभावित हो रही है।

7 महीने से चिंता कर रहे हैं, धरातल पर कुछ नहीं

शिक्षा सचिव कृष्ण कुणाल ने कोर्ट को बताया कि जर्जर भवनों वाले स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की गई है, जैसे पेड़ों के नीचे या निजी भवनों में। हालांकि, कोर्ट ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आप 7 महीने से क्या चिंता कर रहे हैं, वो दिख रहा है। सितंबर से आप यही जवाब देते आ रहे हैं। कई जगहों पर तो पेड़ ही नहीं हैं, वहां क्या व्यवस्था है?

अब पेड़ भी गवाही देने यहां आते हैं

कोर्ट ने तकनीकी विकास का जिक्र करते हुए कहा कि अब समय वह नहीं रहा, अब पेड़ भी गवाही देने यहां आते हैं। यह बयान विभाग की रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है, जहां वास्तविक स्थिति की जांच के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लिया जा सकता है।

फंड की कमी का बहाना

शिक्षा सचिव ने कोर्ट को सूचित किया कि सभी सरकारी स्कूलों के जर्जर भवनों की मरम्मत और नए निर्माण के लिए 20 हजार करोड़ रुपए की जरूरत है, लेकिन केंद्र सरकार बजट नहीं दे रही है। राज्य सरकार सीएसआर फंड, एमपी-एमएलए फंड से 20 प्रतिशत राशि जुटाने का प्रयास कर रही है। कोर्ट ने कहा कि फिर भी आप लोग फंड की व्यवस्था नहीं कर पाए।

अगली सुनवाई 16 को, दी सख्त चेतावनी

खंडपीठ ने मामले में अगली सुनवाई 16 फरवरी को तय की है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि विभाग को अपनी रिपोर्ट में सुधार करना होगा और धरातल पर बदलाव दिखाना होगा।

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