Thursday, January, 29,2026

ब्रह्मोस से अपाचे तक दिखी भारत की ताकत

जयपुर: जयपुर ने गुरुवार को इतिहास रच दिया। 78वें सेना दिवस के अवसर पर पहली बार गुलाबी नगरी की सड़कों पर भारतीय सेना की भव्य परेड आयोजित हुई, जिसने न केवल सैन्य शक्ति का प्रदर्शन किया, बल्कि सेना और आम जनता के बीच भावनात्मक जुड़ाव को भी नई ऊंचाई दी। आर्मी एरिया से बाहर, शहर की खुली सड़कों पर हुई इस ऐतिहासिक परेड ने जयपुर को पूरे देश की निगाहों का केंद्र बना दिया। जगतपुरा स्थित महल रोड के हरे कृष्ण मार्ग पर आयोजित इस परेड को देखने के लिए करीब पांच लाख लोग उमड़ पड़े। सड़क के दोनों ओर देशभक्ति से सराबोर जनसैलाब दिखाई दिया। 'भारत माता की जय', 'जय हिंद की सेना' और 'वंदे मातरम्' के नारों से पूरा इलाका गूंज उठा। तिरंगे लहराते हाथ, आंखों में गर्व और चेहरों पर भावुकता-यह दृश्य अपने आप में अविस्मरणीय था।

वीरता और अनुशासन की जीवंत झलक

परेड का नेतृत्व परमवीर चक्र, अशोक चक्र, महावीर चक्र, कीर्ति चक्र और वीर चक्र से सम्मानित अधिकारियों ने किया। उनके नेतृत्व में कदमताल करती टुकड़ियों ने सेना के अनुशासन, साहस और समर्पण की मिसाल पेश की। 61वीं कैवेलरी के घुड़सवार दल की शान-ओ-शौकत ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। यह दुनिया की एकमात्र सक्रिय घुड़सवार रेजिमेंट है, जिसकी मौजूदगी ने परेड को ऐतिहासिक गरिमा प्रदान की। इसके अलावा भैरव बटालियन और डोगरा रेजिमेंट की सधी हुई कदमताल ने सेना की परंपरा और जुझारूपन को दर्शाया। नेपाल आर्मी बैंड की प्रस्तुति ने भारत-नेपाल की मित्रता और सैन्य सहयोग का सशक्त संदेश दिया।

आधुनिक सैन्य शक्ति का भव्य प्रदर्शन

परेड में भारतीय सेना की आधुनिक युद्ध क्षमता और तकनीकी ताकत का शानदार प्रदर्शन किया गया। ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, भीष्म और अर्जुन मुख्य युद्धक टैंक, पिनाका मल्टी बैरल रकिट लॉन्चर, नाग मिसाइल सिस्टम, अपग्रेडेड शिल्का गन, सारथ (बीएमपी-2) और अत्याधुनिक रोबोटिक डॉग्स ने लोगों को रोमांचित कर दिया। खास आकर्षण रहा 46 मीटर लंबा मॉड्यूलर ब्रिज, जिसे युद्ध के हालात में कुछ ही समय में नदियों और खाइयों पर स्थापित किया जा सकता है। यह प्रदर्शन सेना की रणनीतिक तैयारी और आपदा प्रबंधन क्षमता को भी दर्शाता है। आकाश में उड़ते अपाचे अटैक हेलीकॉप्टरों ने जब करतब दिखाए और हेलीकॉप्टर से फूलों की वर्षा हुई, तो पूरा माहौल भावुक हो उठा। नाल एयरबेस, बीकानेर से उड़कर आए जगुआर फाइटर जेट्स ने अपनी गर्जना से आसमान को भी सेना दिवस का साक्षी बना दिया। इन विमानों की विशेषताओं और भूमिका की जानकारी आम जनता के लिए परेड के दौरान साझा की गई।

भावुक हुआ माहौल

परेड की शुरुआत ऑपरेशन सिंदूर में शहीद हुए जवानों को सेना मेडल प्रदान कर सम्मानित करने के साथ हुई। यह क्षण पूरे आयोजन का सबसे मार्मिक पल बन गया। विशेष रूप से 1 पैरा स्पेशल फोर्स के शहीद लांस नायक प्रदीप कुमार की मां जब मेडल ग्रहण करते समय मंच पर बेहोश हो गईं, तो वहां मौजूद हर आंख नम हो गई। सेना के अधिकारियों ने तत्काल उन्हें संभाला और एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाया।

शक्ति महिला और भविष्य की युद्ध क्षमता

सेना दिवस परेड में महिला शक्ति की भी विशेष झलक देखने को मिली। 251 आर्मी एविएशन स्क्वॉइन की कैप्टन हंसजा शर्मा ने रुद्र हेलीकॉप्टर उड़ाने वाली पहली महिला पायलट बनकर इतिहास रच दिया। उनके नेतृत्व में हेलिना एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल का प्रदर्शन किया गया, जिसने सेना की भविष्य की युद्ध क्षमता को रेखांकित किया। इसके साथ ही सूर्यास्त मल्टी-कैलिबर रॉकेट सिस्टम, रोबोटिक म्यूल, और अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों ने यह साफ कर दिया कि भारतीय सेना हर तरह की चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है, चाहे वह रेगिस्तान हो, पहाड़ हो या आधुनिक तकनीक आधारित युद्ध।

विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति

कार्यक्रम में मिजोरम के राज्यपाल जनरल वी. के. सिंह मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। उनके साथ राज्यपाल हरिभाऊ बागडे, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी, उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी, मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़, मुख्य
सचिव वी. श्रीनिवास, डीजीपी राजीव शर्मा सहित अनेक मंत्री, वरिष्ठ सैन्य और प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे। सुरक्षा के लिए पूरे इलाके में कड़े इंतजाम किए गए थे। मेटल डिटेक्टर, डॉग स्वचॉड और बहुस्तरीय जांच व्यवस्था के बीच यह विशाल आयोजन पूरी तरह शांतिपूर्ण और अनुशासित सेत ढंग से संपन्न हुआ।

सांस्कृतिक रंगों में रंगा सेना दिवस

परेड के दौरान राजस्थान पर्यटन, कला एवं संस्कृति विभाग की भव्य झांकी भी आकर्षण का बड़ा केंद्र रही। इस झांकी में मोलेला टेराकोटा, जयपुरी ब्लू पॉटरी, फड़ चित्रकला और पारंपरिक हस्तशिल्प की जीवंत झलक दिखाई गई। विशाल कठपुतली, अंगुलियों पर नाचती कठपुतलियां, भरतपुर की फूलों की होली, बम रसिया नृत्य, कालबेलिया, कच्छी घोड़ी और मोरु सपेरा के नेतृत्व में प्रस्तुत लोक नृत्यों ने राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय मंच पर सशक्त रूप से प्रस्तुत किया।

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