Thursday, January, 29,2026

सुशासन, अनुशासन और विकास... भरोसे की राजनीति का नया अध्याय

राजस्थान में 15 दिसंबर अब महज एक तारीख नहीं रह गई है। यह दिन सुशासन, जिम्मेदारी और उपलब्धियों का प्रतीक बन चुका है। भजनलाल शर्मा ने ठीक दो वर्ष पहले इसी दिन राजस्थान के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। आम जब उनका कार्यकाल दो साल पूरे कर चुका है, यह अवसर दोहरी खुशी का है, एक ओर जन्मदिन की शुभकामनाएं और दूसरी ओर उस नेतृत्व का आकलन, जिसने बिना शोर-शराबे के, लेकिन सख्त और परिणाम आधारित फैसलों से शासन की नई शैली गढ़ी है। भारतीय जनता पार्टी के संगठनात्मक ढांचे से निकलकर सत्ता के शीर्ष तक पहुंचे भजनलाल शर्मा का चयन शुरू से ही एक स्पष्ट संकेत था। यह फैसला केवल राजनीतिक संतुलन या क्षेत्रीय समीकरणों का परिणाम नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीप गृहमंत्री अमित शाह के भरोसे की अभिव्यक्ति था। संगठन में लंबा अनुभव, कार्यकर्ताओं के बीच स्वीकार्यता और बेदाग छवि, इन आधारों पर सत्ता संभालने वाले भजनलाल शर्मा ने दो वर्षों में यह साबित किया कि वे केवल प्रशासक नहीं, बल्कि दीर्घकालिक दृष्टि रखने वाले मुख्यमंत्री हैं।

अपने कार्यकाल के आरंभ से ही मुख्यमंत्री ने यह स्पष्ट कर दिया था कि भ्रष्टाचार, अनियमितता और लापरवाही के लिए सरकार में कोई स्थान नहीं होगा। जल जीवन मिशन से जुड़े घोटाले में पूर्व मंत्री को गिरफ्तारी से लेकर एसीएस स्तर के वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ एसीबी जांच तक, सरकार ने यह संदेश दिया कि पद, रसूख और राजनीतिक पहचान कानून से ऊपर नहीं हैं। आरएएस अधिकारियों के निलंबन, दोषियों के खिलाफ सार्वजनिक कार्रवाई और प्रशासनिक अनुशासन ने भजनलाल शमां को 'मिस्टर क्लीन' की छवि में स्थापित किया।

राजस्थान लंबे समय तक भर्ती परीक्षाओं में गड़चड़ियों के लिए बदनाम रहा। भजनलाल शर्मा सरकार के सामने यह विश्वास बहाली की सबसे बड़ी चुनौती थी। जीरो टॉलरेंस नीति, विशेष जांच तंत्र और सख्त निगरानी के चलते चीते दो वर्षों में परीक्षा प्रणाली में निर्णायक सुधार देखने को मिला। दिसंबर 2023 के बाद से नवंबर 2025 तक राजस्थान लोक सेवा आयोग और अधीनस्थ कर्मचारी चयन बोर्ड द्वारा 296 छोटी-बड़ी प्रतियोगी परीक्षाएं सफलतापूर्वक संपन करई गई। इस अवधि में डमी अभ्यर्थियों, फर्जी डिग्रियों और परीक्षा माफिया से जुड़े मामलों में 138 एफआईआर दर्ज हुई और 394 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इससे पहले जिन परीक्षाओं पर सवाल उठते थे, वहां अब पारदर्शिता और विश्वास का माहौल बनता दिखाई दे रहा है। एसआई भर्ती परीक्षा-2021 जैसे संवेदनशील मामलों में निर्णायक रुख ने सरकार की मंशा को पूरी तरह स्पष्ट कर दिया।

इंस्टर्न राजस्थान कैनाल प्रोजेक्ट (ईआरसीपी) को पावीत्री-कालीसिंध चंबल से जोड़कर रामजल सेतु लिंक परियोजना के रूप में वृहद् आकार में गति देना इस सरकार की सबसे बड़ी रणनीतिक उपलब्धियों में शामिल है। केंद्र सरकार के साथ निरंतर संवाद और राजनीतिक इच्छाशक्ति के चलते इस परियोजना को राष्ट्रीय महत्व दिलाने की दिशा में ठोस प्रगति हुई। रामजल सेतु लिंक परियोजना और यमुना जल समझौते से लाखों किसानों को लाभ मिलेगा, कृषि उत्पादकता बढ़ेगी और शहरी क्षेत्रों में जल संकट से राहत मिलेगी। साथ ही, जल उपलब्धता के कारण उद्योग और निवेश के लिए अनुकूल माहौल बनेगा, जो प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति देगा।

राज्य सरकार ने निवेश को केवल एमओयू तक सीमित नहीं रखा। राइजिंग राजस्थान के तहत 37 लाख करोड़ रुपए निवेश के एमओयू उद्योग, ऊर्जा, पर्यटन, खनन और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्रों में हुए, जिनमें 9 लाख करोड़ रुपए की परियोजनाएं धरातल पर उतर चुकी हैं। प्रवासी राजस्थानी सम्मेलन के माध्यम से दुनिया भर में बसे राजस्थानियों को भी राज्य के विकास से जोड़ा गया। शिक्षा, स्वास्थ्य, रियल एस्टेट और पर्यटन से लेकर रोजगार सृजन तक भविष्य में इस निवेश का असर देखने को मिलेगा।

सौर ऊर्जा के क्षेत्र में राजस्थान को देश में नंबर वन बनाने का लक्ष्य अब नीति से निकलकर क्रियान्वयन में बदल चुका है। विशाल सोलर पार्क, निजी निवेश और केंद्र के सहयोग से राजस्थान हरित ऊर्जा का पावरहाउस बनता जा रहा है। इससे ऊर्जा आत्मनिर्भरता के साथ-साथ राजस्व और रोजगार दोनों में वृद्धि हो रही है। जयपुर मेट्रो फेज-2 की डीपीआर को मिली मंजूरी शहरी विकास की दिशा में बड़ा कदम है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में मुख्यमंत्री ग्रामीण सड़क योजना, श्री अन्नपूर्णा रसोई योजना, मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना, निशुल्क दवा एवं जांच योजना, लाडो प्रोत्साहन योजना, समाज कल्याण विभाग की पेंशन राशि में वृद्धि, मुफ्त बिजली का दायरा बढ़ाकर 150 यूनिट करने और स्टार्टअप नवाचार जैसी योजनाओं ने आमजन के जीवन पर सीधा और सकारात्मक प्रभाव डाला है।

भजनलाल शर्मा दो साल के कार्यकाल में करीब तेरह साल से रंग-रंगकर चल रही राजस्थान की महत्वाकांक्षी पचपदरा रिफायनरी परियोजना को अब धरातल पर उतारने की स्थिति में ले आए हैं। कुछ दिन पहले राजस्थान की मेजबानी में राष्ट्रीय यूनिवर्सिटी गेम्स का सफल आयोजन कर उन्होंने खेल प्रेमियों को बड़ी सौगात दी। वहीं सरकार ने प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने और अनावश्यक मुकदमेबाजी का बोझ कम कर व्यावसाय के अनुकूल वातावरण बनाने के लिए राजस्थान जनविश्वास अध्यादेश 2025 भी लागू किया।

चुनावी संकल्प पत्र के लगभग 70 प्रतिशत वादों का दो वर्षों में पूरा होना सरकार की कार्यक्षमता को दर्शाता है। शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला एवं चाल विकास, युवा वर्ग, किसान और श्रमिक कल्याण, हर क्षेत्र में सरकार का फोकस क्रियान्वयन पर रहा है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की कार्यशैली का एक महत्वपूर्ण पहलू उनका दिल्ली संवाद है। लगभग हर दिल्ली दौरे के दौरान पांच-छह केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात कर राजस्थान से जुड़ी योजनाओं को मंजूरी दिलाना उनकी सक्रियता को दशोता है। सड़क, रेल, जाल, ऊर्जा और सामाजिक क्षेत्र को कई केंद्रीय योजनाओं को राज्य में तेजी से लागू करने में यह संवाद निर्णायक साबित हुआ है।

भजनलाल शर्मा को राजनीतिक ताकत केवल प्रशासनिक फैसलों तक सीमित नहीं है। उनकी सबसे बड़ी पूंजी उनका कार्यकर्ता-कनेक्ट है। कभी भी मार्निंग वॉक पर निकलकर आमजन से मुखातिब हो जाना। चाय की थड़ी पर बैठकर जनता से चर्चा करना। गांव के चौपाल पर बैठकर ग्रामीणों से रूबरू होना, उनकी कार्यशैली का हिस्सा बन गए हैं। दरअसल, मुख्यमंत्री बनने के बाद भी उन्होंने संगठनात्मक संस्कारों को छोड़ा नहीं। जनसुनवाई, कार्यकर्ताओं से संवाद और फीडबैक आधारित निर्णयों ने पार्टी के भीतर यह धारणा मजबूत की कि सत्ता और संगठन के बीच दूरी नहीं बनने दी जाएगी।

दो वर्ष पूरे होने के साथ यह स्पष्ट हो गया है कि भजनलाल शर्मा अब केवल संगठन के नेता नहीं, बल्कि राजस्थान की राजनीति में एक संतुलित, सख्त और भरोसेमंद मुख्यमंत्री के रूप में स्थापित हो चुके हैं। अपने जन्मदिन के साथ जुड़ा यह कार्यकाल उनके लिए व्यक्तिगत उत्सव भर नहीं, बल्कि उस राजनीतिक यात्रा का प्रतीक है, जिसमें सुशासन, अनुशासन और विकास... तीनों एक साथ चलते दिखाई देते हैं।

 

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