Sunday, April, 06,2025

समाज को बांटने का प्रयास कर रहे हैं स्टालिनः वैष्णव

नई दिल्ली: सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन की हिंदी थोपने संबंधी टिप्पणी को उनकी सरकार के खराब शासन को छिपाने के लिए समाज को बांटने का ओछा प्रयास बताया और सवाल किया कि क्या कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी द्रमुक नेता के विचारों से सहमत हैं।

स्टालिन द्वारा द्रमुक कार्यकर्ताओं को लिखे गए पत्र पर प्रतिक्रिया में वैष्णव ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि समाज को विभाजित करने के ऐसे ओछे प्रयासों से खराब शासन कभी नहीं छिप पाएगा। पत्र में स्टालिन ने दावा किया कि बिहार, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में बोली जाने वाली मैथिली, ब्रजभाषा, बुंदेली और अवधी जैसी कई उत्तर भारतीय भाषाएं हिंदी के वर्चस्व के कारण नष्ट हो गई हैं। वैष्णव ने सवाल किया कि क्या स्टालिन से लोकसभा में विपक्ष के नेता गांधी सहमत हैं। वैष्णव ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, यह जानना दिलचस्प होगा कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी का इस विषय पर क्या कहना है। क्या वह हिंदी भाषी क्षेत्र की सीट के सांसद के रूप में इससे सहमत हैं।

हिंदी मुखौटा है, संस्कृत चेहरा है: स्टालिन

इस बीच, स्टालिन ने एक बार फिर गुरुवार को कहा कि राज्य हिंदी भाषा को थोपने की इजाजत नहीं देगा और उन्होंने तमिलों एवं इसकी संस्कृति की रक्षा करने का संकल्प जताया। पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित एक पत्र में उन्होंने कहा, हम हिंदी थोपने का विरोध करेंगे। हिंदी मुखौटा है, संस्कृत छिपा हुआ चेहरा है। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु एनईपी का विरोध कर रहा है क्योंकि केंद्र शिक्षा नीति के माध्यम से हिंदी और संस्कृत को थोपने की कोशिश कर रहा है।

25 से अधिक मूल भाषाएं हो गई नष्ट

स्टालिन ने कहा, आधिपत्यवादी हिंदी संस्कृत भाषाओं के हस्तक्षेप से 25 से अधिक उत्तर भारतीय मूल भाषाएं नष्ट हो गई हैं। जागरुकता के कारण सदियों पुराने द्रविड आंदोलन और विभिन्न आंदोलनों ने तमिलों और उनकी संस्कृति की रक्षा की। पत्र में स्टालिन ने दावा किया कि बिहार, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में बोली जाने वाली मैथिली, ब्रजभाषा, बुंदेलखंडी और अवधी जैसी कई उत्तर भारतीय भाषाओं को 'आधिपत्यवादी हिंदी ने नष्ट कर दिया है।'

कई राज्यों में केवल संस्कृत को बढ़ावा

एनईपी के अनुसार तीसरी भाषा विदेशी भी हो सकती है, भाजपा के इस दावे का जवाब देते हुए स्टालिन ने दावा किया कि त्रिभाषा नीति कार्यक्रम के अनुसार, कई राज्यों में केवल संस्कृत को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा शासित राजस्थान उर्दू प्रशिक्षकों के बजाय संस्कृत शिक्षकों की नियुक्ति कर रहा है। अगर तमिलनाडु त्रिभाषा नीति को स्वीकार करता है, तो मातृभाषा को नजरअंदाज कर दिया जाएगा और भविष्य में संस्कृतीकरण होगा। संस्कृत के अलावा अन्य भारतीय भाषाओं को स्कूलों में पढ़ाया जाएगा और तमिल जैसी अन्य भाषाओं को ऑनलाइन पढ़ाया जा सकता है।

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