Friday, August, 29,2025

भागवत के बयान से अनिश्चितता-असमंजस की स्थिति का पटाक्षेप

नई दिल्ली: आरएसएस के स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर विज्ञान भवन, दिल्ली में आयोजित एक विशेष समारोह में गुरुवार को संघ प्रमुख मोहन भागवत ने स्पष्ट और दो टूक बयान देकर पिछले कई महीनों से चल रही असमंजस की स्थिति को समाप्त कर दिया।

उन्होंने कहा, "ना मैं रिटायर हो रहा हूं, ना किसी को कहूंगा।" भागवत का यह बयान उनके द्वारा 11 सितंबर 2024 को दिए गए उस कथन की पृष्ठभूमि में आया है, जिसमें उन्होंने 75 वर्ष की उम्र में स्वयं या अन्य के रिटायरमेंट की संभावना जताई थी। उस बयान के बाद संघ और भाजपा के उच्च स्तर पर नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें शुरू हो गई थीं। लेकिन गुरुवार के इस ताजा बयान ने सभी अफवाहों पर विराम लगा दिया है। भाजपा और संघ दोनों ने मोहन भागवत के इस बयान का खुलकर स्वागत किया है।
इस बयान से केवल नेतृत्व की स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है, बल्कि यह भाजपा और संघ के बीच मानसिक और वैचारिक एकता को
भी मजबूत करता है। इस बयान के साथ ही कुछ लोगों की दबी हुई महत्वाकांक्षाओं का भी अंत हो गया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कोई विकल्प नहीं

भागवत का यह बयान केवल व्यक्तिगत स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय राजनीति और भाजपा की भविष्य की रणनीति से भी जुड़ा है। उनका यह स्पष्ट संदेश है कि भाजपा के पास मौजूदा हालात में फिलहाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कोई विकल्प नहीं है और मोदी ही 2047 तक विकसित भारत के एजेंडे को आगे बढ़ा सकते हैं। नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद ही आरएसएस के कई दशकों पुराने सपने जैसे राम मंदिर निर्माण और धारा 370 हटाने को साकार किया गया। मोदी स्वयं भी एक आरएसएस प्रचारक रहे हैं और उनके साथ संघ की वैचारिक संगति और कार्यनीतिक मेल की नींव गहरी है।

कोई नहीं रोक सकेगा भारत का रास्ता

प्रधानमंत्री की चीन यात्रा से ठीक पहले संघ प्रमुख के बयान का सामरिक महत्व भी है। जब तक अपने पुराने स्वयंसेवक मोदी के साथ आरएसएस दृढ़ता के साथ खड़ा है, तब तक भारत के आगे बढ़ने का रास्ता कोई नहीं रोक सकेगा। ट्रंप की टैरिफ धमकियों के बीच यह बात और भी महत्वपूर्ण हो जाती है... क्योंकि, चीन की यात्रा में नरेन्द्र मोदी की नई कूटनीति के चलते ट्रंप के टैरिफ वार का सामना करने के लिए भारत-चीन-रूस का एक नया शक्तिशाली त्रिकोण बन सकता है। ऐसे में आरएसएस सहित सभी प्रगतिशील शक्तियों का नरेन्द्र मोदी के साथ खड़े रहना जरूरी है और संघ प्रमुख का यह बयान देश की राजनीतिक स्थिरता और रणनीतिक स्पष्टता का संकेत देता है।

... और मजबूत हुआ भागवत का कद

बिहार चुनावों की पृष्ठभूमि में भी इस बयान के कई मायने निकाले जा रहे हैं। इस बयान से भाजपा को चुनावी लाभमिल सकता है और विपक्ष की कई अंदरूनी रणनीतियां कमजोर हो सकती हैं। कुल मिलाकर, मोहन भागवत का यह बयान संघ और भाजपा की एकजुटता को और बल देता देता है। है तथा उनकी राजनीतिक प्रासंगिकता और नेतृत्व को नया आयाम देता है। इस बयान से भागवत का संघ और भाजपा दोनों में कद और मजबूत हो गया है।

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