Thursday, February, 12,2026

खेजड़ी केवल एक पेड़ नहीं... बल्कि थार का अस्तित्वः चौधरी

बीकानेर: बीकानेर में 'खेजड़ी बचाओ' आंदोलन मंगलवार को नौवें दिन भी जारी रहा। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के आश्वासन के बावजूद महापड़ाव समाप्त नहीं हुआ है। आंदोलन से जुड़े नेताओं का कहना है कि जब तक खेजड़ी संरक्षण को लेकर कानून नहीं बनाया जाता, तब तक महापड़ाव और क्रमिक अनशन जारी रहेगा। बिश्नोई धर्मशाला के सामने 100 से अधिक पर्यावरण प्रेमी क्रमिक अनशन पर बैठे हैं। इस बीच पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं बायतु विधायक हरीश चौधरी महापड़ाव स्थल पर पहुंचे और आंदोलनकारियों को संबोधित किया। अपने संबोधन में चौधरी ने खेजड़ी संरक्षण को धार के अस्तित्व से जोड़ते हुए कहा कि इस धरती पर सबसे पहले खेजड़ी आई और हम बाद में आए। यदि हमें अपना अस्तित्व बचाना है, तो खेजड़ी को बचाना ही होगा। उन्होंने कहा कि खेजड़ी केवल एक वृक्ष नहीं, बल्कि धार की जीवनरेखा, आस्था और संस्कृति का आधार है। यह संघर्ष किसी राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि पूरे थार क्षेत्र की अस्मिता का संघर्ष है। हर थारवासी को इस आंदोलन में सहभागी बनना चाहिए, क्योंकि यह लड़ाई आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की लड़ाई है। चौधरी ने कहा कि वे बीकानेर किसी राजनीति के लिए नहीं, बल्कि अपने और अपने समाज के अस्तित्व को बचाने के लिए
आए हैं। यदि खेजड़ी नहीं रहेगी, तो थार का पर्यावरण संतुलन बिगड़ जाएगा, पशुधन संकट में आ जाएगा, खेती प्रभावित होगी और रेगिस्तान की जीवन प्रणाली कमजोर हो जाएगी।

समाधान निकालने की अपीलः

हरीश चौधरी ने आमरण अनशन पर बैठे संतों, महिलाओं और युवाओं के साहसा को नमन करते हुए कहा कि जो लोग प्रकृति और जीवनदायी वृक्षों की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं, वे वास्तव में आने वाली पीढ़ियों के लिए लड़ रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते खेजड़ी संरक्षण को लेकर प्रभावी निर्णय नहीं लिए गए, तो थार क्षेत्र गंभीर पर्यावरणीय संकट का सामना करेगा। उन्होंने प्रदेश सरकार से संवेदनशीलता दिखाने, आंदोलनकारियों से संवाद स्थापित करने और सकारात्मक समाधान निकालने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह किसी पार्टी का आंदोलन नहीं, बल्कि थार की अस्मिता का आंदोलन है। अपने भाषण के अंत में उन्होंने कहा कि यह आंदोलन तब तक जारी रहना चाहिए, जब तक खेजड़ी को पूर्ण संरक्षण का दर्जा नहीं मिल जाता। यह संघर्ष थार की मिट्टी, संस्कृति और अस्तित्व को बचाने का संघर्ष है, जिसमें हर नागरिक की भागीदारी आवश्यक है।

नियमों में कठोर बदलाव की मांगः हरीश चौधरी ने सरकार से मांग की है कि खेजड़ी संरक्षण को लेकर नियमों में ठोस और कठोर बदलाव किए जाएं। खेजड़ी की अंधाधुंध कटाई पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए और इसके संरक्षण के लिए विशेष कानूनी प्रावधान लागू किए जाएं। चौधरी ने कहा कि दिल्ली और जयपुर के अधिकारी कहते हैं कि एक के बजाय दूसरी खेजड़ी का पेड़ लगा दो। उन्हें नहीं पता कि एक खेजड़ी को तैयार करने में 60 साल लग जाते हैं। एक जीवन में कोई खेजड़ी का पेड़ नहीं लगा सकता। ऐसे में जिस खेजड़ी को काटा गया है, उसे वापस लगाने में पूरा जीवन निकल जाता है।

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