Sunday, April, 06,2025

8 साल बाद नियमों में संशोधन सरकारी आवास आवंटन प्रक्रिया में अब आएगी पारदर्शिता

जयपुर: सरकार ने आठ साल बाद सरकारी आवास आवंटन के नियमों में संशोधन किया है। जीएडी ने इस संबंध में हाल ही नया आदेश जारी किया है। अब नए वेतनमान (पे लेवल) के आधार पर राज्यकर्मियों को फर्स्ट ग्रेड से लेकर फिफ्थ ग्रेड तक के आवासों का आवंटन किया जाएगा। इससे आवंटन प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और कर्मियों को वेतनमान के अनुसार उचित आवास मिलेंगे।

उल्लेखनीय है कि राजधानी जयपुर में मंत्रियों से लेकर अफसरों और बाबुओं के सरकारी आवास आवंटन में नियमों की पालना से ज्यादा उनकी अनदेखी होती रही है। पिछली कांग्रेस सरकार में सिविल लाइंस और गांधी नगर में तो आवासों के आवंटन 'जिसकी लाठी उसकी भैंस' की तर्ज पर हुए थे। चहेतों व अपात्रों कों बड़े आवास आवंटित किए गए। अफसरों के लिए 'ईयर मार्क' बंगले राजनेताओं को दिए गए। हवा सड़क पर चंबल गेस्ट हाउस कॉलोनी में बड़े व आलीशान बंगले छुटभैया राजनेताओं तक को दे दिए गए थे। इस मामले में जीएडी का आवास आवंटन मैनेजमेंट फेल हो गया था। हालांकि नई सरकार में आवास आवंटन सिस्टम काफी कुछ ठीक हुआ है, लेकिन इस संबंध में कई ठोस निर्णयों की गुंजाइश है। 

सिविल लाइंस में अनाधिकृत कब्जे वाले बंगलों को खाली करवाया जाना चाहिए। कुछ बंगले अभी खाली पड़े हैं। एक बंगला तो सालों से उजाड़ पड़ा है। एक मंत्री ने पड़ोस के खाली बंगले की दीवार तोड़ कर उस कब्जा जमा लिया है। मतलब दो-दो बंगलों के मजे। आवास आवंटन के मामले में जीएडी ने जो नए नियम-कायदे बनाए हैं, उन पर सही व पारदर्शी अमल से ही व्यवस्थाएं चुस्त-दुरुस्त हो सकती हैं। मामला सरकार की छवि से सीधा जुड़ा हुआ है।

जयपुर कलेक्टर को 25 साल से नहीं मिला स्थाई आवास

राजधानी जयपुर के कलेक्टर का आवास भूल-भुलैया है। इस महत्वपूर्ण व जनता से सीधे जुड़ाव वाले नौकरशाह का आज दिन तक कोई स्थाई ठौर-ठिकाना नहीं रहा है। पिछले 25 वर्षों में जितने भी कलेक्टर आए है, सबके आवास अलग-अलग रहे हैं। राजकाज से वास्ता रखने वाले भी बहुत से लोगों को पता नहीं होगा कि जयपुर के मौजूदा कलेक्टर जितेंद्र सोनी कहां रहते हैं? कलेक्टर बनने के कई हफ्तों तक तो जितेंद्र सी-स्कीम में ही निजी आवास में रहते रहे। फिर जीएडी ने गांधी नगर में एक कोने में, कई दिनों से उजाड़ पड़ा एक बंगला आवंटित किया है। गौरतलब है कि जयपुर को छोडकर प्रदेश के सभी जिलों में कलेक्टर का निवासी स्थाई व 'ईयर मार्क' बंगला होता है। इसी कारण जयपुर कलेक्टर को वांछित रुतबा और शान-शौकत नहीं मिल पाती। नया कलेक्टर- नया आवास यह विचित्र स्थिति है। न जाने जीएडी ने पिछले 25-30 वर्षों में इस विषय पर ध्यान क्यों नहीं दिया? जयपुर में बनीपार्क में कलेक्टर ऑफिस के पास कांग्रेस पार्टी ने दो बड़े बंगले कुछ समय पहले खाली किए हैं। उन्हें बहुत सरलता से 'कलेक्टर आवास' बनाया जा सकता है। सरकार के सीनियर अफसरों को इस मामले में रुचि लेनी चाहिए।

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