Sunday, April, 06,2025

बेबस जनता को सदन चलने का इंतजार

जयपुर: विधानसभा में शुक्रवार से गतिरोध बना हुआ है। प्रदेश की सबसे बड़ी पंचायत में जहां जनहित के मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए, वहां कोरी बयानबाजी और हंगामा दिखाई दे रहा है। जनता को इंतजार है कि कब उनके चुने हुए जनप्रतिनिधि उनकी तकलीफों को विधानसभा में उठाकर राहत दिलवाएंगे। इसके बावजूद सत्ता पक्ष और प्रतिपक्ष के विधायक आपसी बयानबाजी में उलझ संसदीय परंपराओं की धज्जियां उड़ा रहे हैं। आसन को भी नहीं बक्शा जा रहा है। दादी और बाप जैसे शब्दों का उपयोग गलत अर्थों में एक-दूसरे को नीचा दिखाने के लिए किया जा रहा है। 'सच बेधड़क' के हिमांशु शर्मा और लोकेश ओला ने प्रदेश के उन सभी नेताओं से बात की, जिनकी जिम्मेदारी प्रदेश और विधानसभा में स्वस्थ परपंराओं को बनाने की है।

नेता प्रतिपक्ष जूली असहाय : राठौड़

  • विधानसभा में पांच दिनों से गतिरोध जारी है, कैसे देखते हैं?

कांग्रेस विधानसभा में हर दिन नया विवाद खड़ा करना चाहते है। सदन में बजट प्रस्तुत होने के चाद क्सीस ने, खासकर इनके प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने जो वातावरण बनाया है, उससे लोकतंत्र शर्मसार हुला है। कांग्रेस पूरे प्रकरण में राजनीति कर रही है। डोटासरा सदन को चलने नहीं देना चाहते हैं, सदन को सईजैक करना चाहते हैं, जो संभव नहीं है। वे नोख प्रतिपक्ष टीकाराम कुलों को भी चोलने का मौका नहीं देते। जूली असाय दिख रहे हैं। सदन लोकतांत्रिक व्यवस्था से ही फलेगा। सबसे बड़ी बात तो यही है कि बेठमा विधानसभा अध्यक्ष के आसन तक पहुंचे। उन्होंने कई पहुंचकर जो आचरण किया उससे सदन को गरिमा को ठेस पहुंचे है। डोटासरा ने ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया, जिन्हें दोडयना भी उचित नहीं हैं।

 

  • कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष कह रहे हैं कि वो माफी मांगने को तैयार हैं?

डोटासरा पहले तो विधानसभा अध्यक्ष के ऑफिस में वादा करके आए, परंतु सदन में बदल गए और खेद प्रकट नहीं करके चादा खिलाफी की। कांग्रेस को माफो मांगनी चाहिए और सदन को चलाने में सहयोग करना चाहिए। सदन और आमन का सम्मान करते हुए नियमों का पालन करना एक व्यवस्था होती. है। इसलिए कांग्रेस्र नेताओं को मदन को गरिमा का ध्यान रखना चाहिए। डोटासरा ने सदन में और बाहर ऐसे शब्दों का उपयोग किया, नो गरिमापूर्ण नहीं थे। डोटासरा ने सदन की गरिमा को तार-तार किया है। संविधान की रक्षा का नाटक करने वाले लोगों ने संविधान और सदन का मजाक बनाया है। राठौड़ ने कहा कि कांग्रेस संविधान का पालन नहीं करती है, चल्कि इसे अपनी जेब में रखती है। डोटासरा द्वारा सदन में माफी मांगना तो दूर की बात, सदन से बाहर भी अनर्गल बोल रहे हैं।

हम बातचीत को तैयार: मंत्री जोगाराम

  • गतिरोध को लेकर विपक्ष से कोई बातचीत हुई?

मेरी किसी से कोई बातचीत नहीं हुई। दिन में जोधपुर था, कांग्रेस की ओर से कोई सदस्य संपर्क में नहीं है। हम बातचीत के लिए तैयार हैं।

पीसीसी अध्यक्ष ने माफी मांगने की बात कही है, उसके बाद गतिरोध टूटने की संभावना?
डोटासरा की लैंग्वेज देखो, उनकी भावना देखो, कहीं भी उनके बयानों में और बातचीत के लहने से नहीं लगता है कि वे ग्लानि भाव से कह रहे हैं।माफी मांगने से आदमी कोई छोटा-बड़ा नहीं होता है। उसकी भावना क्या है. यह महत्वपूर्ण है। हमारी संसदीय परंपरा तार-तार हुई है।

  • गतिरोध कैसे खत्म होगा?

हम भी चाहते हैं कि गतिरोध खत्म हो। चाहे माथी नाराज हो, लेकिन साथियों को समइहऊंगा कि राजस्थान के विकास और जनता के लिए गतिरोध खत्म हो। मुद्दों पर बहस हो, समस्या का समाधान हो, हम प्रयास करेंगे, लेकिन कांग्रेस के सदस्य समाधान के तरीके से समाधान के लिए आएं।

माफी मांगने को तैयार : डोटासरा

  • स्पीकर के खिलाफ गलत भाषा के आरोप ?

यह गलत है। जब गतिरोध हुआ, तब मैं और नेता प्रतिपक्ष विधानसभा अध्यक्ष के चैंबर में चर्चा कर रहे थे। संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि अगर खेद व्यक्त कर दें तो गतिरोध समाप्त हो जाएगा। मैंने सहमति जताई, लेकिन अध्यक्ष बिना समाधान के सदन चले गए। मंत्री ने कार्यवाही स्थगित करने की बात कही लेकिन लौटे नहीं। हमने सदन में आपत्ति जताई, तब कार्यवाही स्थगित हुई। बाद में अध्यक्ष से दोबारा चर्चा हुई और मैंने खेद जताया, जबकि जो शब्द खबरों में चल रहे थे, वे न तो कहे गए और न ही कार्यवाही का हिस्सा थे। इसके बावजूद मैंने मर्यादा बनाए रखने के लिए खेद जताया, लेकिन मंत्री की विवादित टिप्पणी न हटाई गई और न ही उन्होंने खेद प्रकट किया। 

  • सदन में लगातार गतिरोध बढ़ा, ऐसी नौबत क्यों आई?

प्रभारी और अब अध्यक्ष के बयान दर्शाते हैं कि वे विपक्ष को सहन नहीं कर सकते। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ को कांग्रेस पर टिप्पणी करने से पहले अपने और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के प्रयासों को बताना चाहिए। उनका काम केवल दिल्ली से मिली पर्ची पढ़ने तक सीमित है। लेकिन राजस्थान की जनता ने एक मजबूत विपक्ष दिया है, जिससे सरकार घबरा रही है और सदन नहीं चलाना चाहती।

  • गतिरोध समाप्त करने का रास्ता ?

मुख्यमंत्री को पक्ष-विपक्ष के साथ वार्ता करनी चाहिए, जैसे पहले के मुख्यमंत्रियों ने किया था।

  • बिना विपक्ष के जनता के मुद्दे कैसे उठेंगे?

विपक्ष लगातार सरकार की नाकामियों पर सवाल उठा रहा है, लेकिन सरकार जवाब देने में असमर्थ है। उनके ही मंत्री सरकार पर भ्रष्टाचार और जासूसी के आरोप लगा रहे हैं। जब सरकार जवाब नहीं दे पाई तो जानबूझकर गतिरोध बढ़ाया गया। इंदिरा गांधी पर की गई अनुचित टिप्पणी सदन की कार्रवाई से हटाई जाए।

सत्ता के अहंकार से बढ़ा गतिरोधः जूली

  • गतिरोध क्यों बढ़ा?

मंत्री की विवादित टिप्पणी को हटाया जाता तो मामला नहीं बढ़ता। हमने आसन से गुहार लगाई, धरना दिया, लेकिन मत्ता पक्ष के अर्थकार के बलते गतिरोध बढ़ा।

  • सदन सुचारू रूप से कैसे चले?

हमने हरसंभव प्रयास किया। डोटासरा और मैंने खेद जताया, लेकिन सता पक्ष वार्ता के लिए तैयार नहीं। यदि वे चाहे तो गतिरोध तुरंत खत्म हो सकता है।

  • विपक्ष की आवाज सदन में क्यों नहीं सनाई दे रही?

सत्ता पक्ष खुद की तारीफ चाहता है, मंत्री जवाब देने से बचते हैं। वे नहीं चाहते कि जनता के मुद्दे उठे। मुख्यमंत्री कई बार मंत्रियों को फटकार चुके हैं।

  • इंदिरा गांधी पर टिप्पणी पर माफी क्यों नहीं मांगी गई?

मंत्री अईकारी हैं, तानाशाही कर रहे हैं और स्पीकर पर दबाव बना रहे हैं।

  • डोटासरा पर कार्रवाई की मांग?

डोटासरा ने खेद जताया, लेकिन सता पक्ष जानबूझकर माहौल बना रहा है। कोई गलती नहीं हुई, तो कार्रवाई कैसे होगी?

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