Monday, September, 28,2026

सोसायटी, होटल-अस्पतालों को अब खुद करना होगा कचरे का प्रबंधन

जयपुर: शहरों में कचरा अब सीधे लैंडफिल तक पहुंचाने के बजाय उसके पृथक्करण, प्रसंस्करण और पुनर्चक्रण पर जोर रहेगा। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के तहत कचरा प्रबंधन की जिम्मेदारी नगर निकायों के साथ बड़े अपशिष्ट उत्पादकों पर भी तय की गई है। रोजाना 100 किलो या इससे अधिक कचरा पैदा करने वाले बल्क वेस्ट जनरेटर की श्रेणी में आएंगे। बड़ी सोसायटी, होटल, अस्पताल और संस्थान भी इसके दायरे में होंगे। घर-घर से गीला, सूखा, सैनिटरी और विशेष/घरेलू खतरनाक कचरा चार अलग श्रेणियों में एकत्र करना होगा।

इनके लिए अलग संग्रहण और परिवहन व्यवस्था करनी होगी। गीले कचरे का मौके पर ही खाद बनाने, जैव-मीथेनीकरण या अनुमोदित तकनीक से प्रसंस्करण किया जाएगा। राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल में प्रेस सूचना ब्यूरो के सहयोग से शुक्रवार को आयोजित संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में नियमों और क्रियान्वयन की जानकारी दी गई। प्रेस सूचना ब्यूरो के निदेशक अनुभव बैरवा ने ने नियमों की जानकारी आमजन तक पहुंचाने की आवश्यकता बताई। मुख्य पर्यावरण अभियंता प्रेमलाल ने प्रमुख प्रावधानों और आमजन, स्थानीय निकायों व थोक अपशिष्ट उत्पादकों की भूमिका बताई।

सूखे कचरे की अलग व्यवस्था

नगर निकायों को सूखे कचरे के लिए सामग्री पुनर्प्राप्ति केंद्र और पुनर्चक्रण व्यवस्था मजबूत करनी होगी। पुराने डंपिंग स्थलों के कचरे का जैव-खनन और जैव-उपचार कर वैज्ञानिक निस्तारण किया जाएगा। इससे कचरा भराव स्थलों पर निर्भरता कम करने और कचरे को संसाधन के रूप में उपयोग करने पर जोर रहेगा। बल्क वेस्ट जनरेटर की पहचान, पंजीकरण और निगरानी भी नगर निकायों की जिम्मेदारी होगी। जागरूकता से लेकर उपयोगकर्ता शुल्क तक व्यवस्था को प्रभावी बनाने पर जोर है। संग्रहण, परिवहन, प्रसंस्करण और अंतिम निस्तारण की ऑनलाइन निगरानी भी विकसित की जाएगी।

चार श्रेणियों में होगा पृथक्करण

अतिरिक्त मुख्य पर्यावरण अभियंता भुवनेश माथुर ने बताया कि गीले, सूखे, स्वच्छता संबंधी तथा विशेष/घरेलू खतरनाक कचरे को अलग-अलग एकत्र और संग्रहित करना होगा। स्रोत पर पृथक्करण से पुनर्चक्रण और प्रसंस्करण की पूरी श्रृंखला को प्रभावी बनाया जाएगा।

नियम तोड़े तो पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति

'प्रदूषक भुगतान सिद्धांत' के तहत प्रावधानों का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाई जा सकेगी। गलत रिपोर्टिंग और गैर-अनुपालन पर कार्रवाई का प्रावधान है। स्वायत्त शासन विभाग के समन्वय से निगरानी तंत्र को मजबूत किया जाएगा।

100 किलो से अधिक कचरा भी दायरे में

स्थानीय स्वायत्त शासन विभाग के मुख्य अभियंता अरुण व्यास ने बताया कि रोजाना 100 किलो या अधिक कचरा पैदा करने वाले थोक अपशिष्ट उत्पादक माने जाएंगे। बड़े आवासीय परिसर, सोसायटी, होटल, अस्पताल, संस्थान और अन्य प्रतिष्ठान इसके दायरे में आएंगे। इन्हें जैविक कचरे का परिसर में ही प्रसंस्करण करना होगा। पुनर्चक्रण योग्य और खतरनाक कचरे का अधिकृत एजेंसियों के जरिए प्रबंधन करना होगा।

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