Saturday, April, 05,2025

नए कानून से महिलाओं एवं गरीब मुस्लिमों की दशा सुधरेगी: अग्रवाल

नई दिल्ली: लोकसभा में पारित होने के बाद गुरुवार को राज्यसभा में वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025 पेश किया गया। विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्षी दलों के सदस्यों ने इसे संविधान विरोधी बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की। विपक्ष ने आरोप लगाया कि यह विधेयक देश में धर्मनिरपेक्षता को खतरे में डाल सकता है और समुदायों के बीच वैमनस्य बढ़ाएगा। 

उनका कहना था कि देश की गरीबी और अन्य गंभीर समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करना ज्यादा जरूरी है। भाजपा के सांसद डॉ. राधामोहन दास अग्रवाल ने कहा कि यह विधेयक गरीब, पसमांदा मुसलमानों, विधवा और तलाकशुदा महिलाओं के लिए ऐतिहासिक कदम है।

उन्होंने कहा कि हिंदू समाज में पहले ही कई सुधार हुए हैं, लेकिन मुसलमान समाज में सुधार के लिए कभी कानून नहीं लाया गया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने पहली बार मुसलमानों के सुधार के लिए यह कानून पेश किया है।

उन्होंने एसडीपीआई पर आरोप लगाया कि इसने अफवाह फैलाई कि वक्फ संशोधन कानून के पारित होने से मस्जिदों पर सरकार का कब्जा हो जाएगा। अग्रवाल ने वक्फ बोर्ड द्वारा अवैध रूप से जमीनों पर कब्जा करने के आरोप लगाए और कहा कि इससे गरीबों की संपत्ति को नुकसान हो रहा है। भाजपा सांसद ने कर्नाटक की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि इसमें कई पूर्व मंत्रियों, सांसदों, विधायकों के नाम हैं जिन्होंने वक्फ की जमीन पर कब्जा जमा लिया।

संविधान पर आघात कर रही सरकार: आप

आम आदमी पार्टी के संजय सिंह ने सरकार पर आरोप लगाया कि यह विधेयक बाबा साहेब आंबेडकर के संविधान पर हमला है। उन्होंने कहा कि सरकार यह दावा करती है कि यह कानून मुसलमानों के भले के लिए है, जबकि संसद में केवल एक मुसलमान सदस्य है और मंत्रिमंडल में कोई मुसलमान मंत्री नहीं है। सिंह ने विधेयक को "धार्मिक संपत्ति पर कब्जा करने की कोशिश" करार दिया और कहा कि यह धीरे-धीरे दूसरे धमों की संपत्तियों को भी कब्जे में लेगा।

विधेयक समानता के अधिकार के खिलाफ: YSR

वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के वाई वेंकट सुब्बा रेड्डी ने भी इस विधेयक का विरोध किया। उन्होंने इसे मुसलमानों के बुनियादी अधिकारों के खिलाफ और समानता के अधिकार के खिलाफ बताया। रेड्डी ने कहा कि यह विधेयक मुसलमानों की जमात द्वारा कभी स्वीकार नहीं किया जाएगा। माकपा के जान ब्रिटॉस ने विधेयक को लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों के खिलाफ बताते हुए कहा कि यह धार्मिक विश्वासों में भी विभाजन पैदा करेगा।

आरोप साबित करें या इस्तीफा दें अनुराग ठाकुर : खरगे

राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने गुरुवार को भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर द्वारा लोकसभा में उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। खरगे ने ठाकुर से आरोप साबित करने या इस्तीफा देने की चुनौती दी और कहा कि अगर आरोप सही हुए तो वह भी इस्तीफा देंगे। उन्होंने आरोपों को निराधार करार देते हुए कहा कि इन टिप्पणियों से उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है। खरगे ने ठाकुर को चुनौती दी कि वह यह साबित करें कि उन्होंने या उनके परिवार ने वक्फ संपत्तियों पर कब्जा किया है। उन्होंने कहा कि वह एक मजदूर के बेटे हैं और 60 साल के राजनीतिक जीवन में किसी ने उन पर उंगली नहीं उठाई। खरगे ने कहा, "अगर भाजपा मुझे डराना चाहती है, तो मैं उन्हें याद दिलाना चाहता हूं कि मैं टूट सकता हूं, लेकिन झुकूंगा नहीं।" इस पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि विपक्ष के नेता की पीड़ा को समझा गया है और सदन में उच्च सम्मान होना चाहिए। इस पर विपक्षी सदस्यों ने हंगामा किया, लेकिन सभापति जगदीप धनखड़ ने यह कहा कि सभी सदस्य अपनी प्रतिष्ठा की रक्षा करें। बता दें कि लोकसभा में कल वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 पर चर्चा में भाग लेते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री ठाकुर ने कर्नाटक में कई कांग्रेस नेताओं पर वक्फ संपत्तियों में भ्रष्टाचार करने का आरोप लगाते हुए दावा किया था कि विपक्षी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का नाम भी इसमें आया है।

सभी धर्मों के साथ समान व्यवहार होना चाहिए: सपा

राज्यसभा में सपा नेता रामगोपाल यादव ने सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि जब उसने देश की सारी संपत्ति बेच ली, तब उसकी नजर वक्फ की संपत्ति पर गई। सपा नेता ने कहा कि 2014 से 2024 तक सरकार को याद नहीं रहा कि वक्फ के पास कितनी संपत्ति और कितना पैसा है। यादव ने कहा कि सभी लोग मिल कर काम करेंगे तभी देश की तरक्की हो सकती है। उन्होंने कहा कि सभी धर्मों के साथ समान व्यवहार होना चाहिए और मुसलमानों को यह नहीं लगे कि उनके साथ अन्याय हो रहा है।

मुसलमानों को सरकार पर विश्वास क्यों नहीं: बीजद

बीजू जनता दल के मुजीबुल्ला खान ने विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि अगर किसी के पास अधिक जमीन होती थी, तो वह उसे वक्फ बोर्ड को विकास कार्यों के लिए देता था, ताकि वहां स्कूल, अस्पताल या अन्य उपयोगी संस्थान बने। उन्होंने कहा कि वर्तमान में ऐसे हालात नहीं हैं कि इस विधेयक को लाया जाए। खान ने सरकार से यह भी पूछा कि अगर वह "सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास" का वादा करती है, तो फिर मुसलमानों को सरकार पर विश्वास क्यों नहीं है? उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को मुसलमानों के मन में छिपे डर को दूर करना चाहिए और नमाज पढ़ने के लिए जगह की समस्या का समाधान करना चाहिए।

इस विधेयक पर पुनर्विचार करे सरकारः राजद

राष्ट्रीय जनता दल के मनोज कुमार झा ने कहा कि संविधान में विभिन्न अनुच्छेदों के माध्यम से देश के बंटवारे के बाद समुदायों के बीच विश्वास की कमी को दूर करने की कोशिश की गई थी। उन्होंने सरकार से अपील की कि वह आज के माहौल को देखे और सोचे कि क्या वह अपनी बढ़ती शक्ति का दुरुपयोग कर रहे है। झा ने कहा, "हमारी आदत बन गई है समुदायों को हाशिये पर छोड़ने की।" उन्होंने सरकार से यह अनुरोध किया कि वह इस विधेयक पर पुनर्विचार करे।

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